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गंगा को लेकर घोषणाएं करते रहे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, नहीं ली गंगा पुत्र की सुध
Fri, 22 Feb 2019 11:15 AM IST
अलका त्यागी
हिमांशु भट्ट, अमर उजाला, हरिद्वार
हिमांशु भट्ट, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 22 Feb 2019 11:15 AM IST
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संत आत्मबोधानंद
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को नमामि गंगे योजना के अंतर्गत चंडीघाट पुल के नीचे नवनिर्मित घाट के लोकार्पण के अवसर पर गंगा के संरक्षण के लिए कई घोषणाएं की। लेकिन 121 दिनों से अनशनरत मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की उन्होंने सुध नहीं ली।
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स्वामी सांनद का भी जिक्र नहीं किया। गडकरी ही नहीं समारोह में मौजूद किसी भी नेता को गंगा के लिए तत्पर ब्रह्मचारी की याद नहीं आई। गंगा की अविरलता के लिए विशेष एक्ट बनाने की मांग को लेकर स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आश्वासन देने या हरिद्वार आने की मांग करते रहे लेकिन इंतजार के बाद स्वामी सानंद का 11 अक्तूबर को देहावसान हो गया।
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ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 24 अक्तूबर 2018 को अनशन पर बैठ थे
स्वामी सानंद की मांगों के समर्थन में मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 24 अक्तूबर को अनशन पर बैठ गए थे लेकिन अब तक न तो किसी नेता और न ही किसी अधिकारी ने उनकी सुध ली। बुधवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हरिद्वार आए। उन्होंने गंगा की रक्षा के लिए करोड़ों रुपये की घोषणा तो की लेकिन 121 दिनों से गंगा की अविरलता के लिए अनशनरत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद की याद नहीं आई।
गडकरी गंगा को लेकर अपनी सरकार के प्रयासों और भावी योजनाओं का गुणगान तो करते रहे, लेकिन गंगा की अविरलता के लिए अपने प्राण त्याग चुके गंगा पुत्र और प्रख्यात वैज्ञानिक स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का जिक्र तक नहीं किया। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि गंगा की रक्षा के लिए उन्हें सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। सरकार गंगा की रक्षा के लिए संतों का बलिदान चाह रही है तो मातृसदन बलिदान देने के लिए तैयार है। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद भी मांग पूरी न होने तक अनशन जारी रखने का दृंढ संकल्प कर चुके हैं।
गडकरी गंगा को लेकर अपनी सरकार के प्रयासों और भावी योजनाओं का गुणगान तो करते रहे, लेकिन गंगा की अविरलता के लिए अपने प्राण त्याग चुके गंगा पुत्र और प्रख्यात वैज्ञानिक स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का जिक्र तक नहीं किया। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि गंगा की रक्षा के लिए उन्हें सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। सरकार गंगा की रक्षा के लिए संतों का बलिदान चाह रही है तो मातृसदन बलिदान देने के लिए तैयार है। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद भी मांग पूरी न होने तक अनशन जारी रखने का दृंढ संकल्प कर चुके हैं।