नीति आयोग को भा गया उत्तराखंड का ये आइडिया
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भविष्य में केंद्र सरकार प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का नाम बदलकर उसे प्रधानमंत्री ग्रामीण संपर्क योजना कर दे तो इसका श्रेय उत्तराखंड को जाएगा।
प्रदेश सरकार का यह आइडिया नीति आयोग को जच गया है और अब वह केंद्र से इसकी पैरवी करने जा रहा है। केंद्र सरकार राजी हो गई तो इसका सभी हिमालय राज्यों को फायदा होगा। दरअसल संपर्क की परिभाषा में सड़क के अलावा रोपवे, स्टीमर और आवागमन के दूसरे माध्यम भी जुड़ जाएंगे। इससे पर्वतीय प्रदेशों को कनेक्टिविटी के दूसरे विकल्पों के लिए बजट उपलब्ध हो सकेगा।
बता दें कि प्रदेश का 86.07 प्रतिशत भूभाग पर्वतीय है। करीब 71 फीसदी वन क्षेत्र है। भौगोलिक कठिनाई और वन क्षेत्र होने की वजह से गांवों को सड़कों से जोड़ने में कठिनाई आ रही है। प्रदेश सरकार ने 2019 तक हर गांव को सड़क से जोड़ने लक्ष्य बनाया है। उसके इस लक्ष्य को साधने में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का सबसे अहम रोल है। मगर हर गांव सड़क से जुड़ जाएगा इसे लेकर शंका है।
सीएस ने लिखा था पत्र, सीएम ने उठाया था मसला
दरअसल, पर्वतीय भूभाग होने की वजह से कई तरह की अड़चन पैदा हो रही है। कहीं वन कानून का पेंच है तो कहीं लागत बढ़ रही है। यानी केवल सड़क से गांवों को जोड़ना मुमकिन नहीं है। इसलिए प्रदेश सरकार ने कनेक्टिविटी के दूसरे विकल्प मसलन, रोप वे, स्टीमर, झूला पुल पर जोर दिया है। मगर इसके लिए बजट की दिक्कत है। इसका समाधान उसे पीएमजीएसवाई में दिखा है।
यही वजह है कि प्रदेश सरकार ने नीति आयोग से पीएमजीएसवाई से सड़क के बजाय संपर्क करने का सुझाव दिया है। ऐसा होने पर कनेक्टिविटी के दूसरे विकल्प योजना में शामिल हो जाएंगे। उसका यह सुझाव नीति आयोग को पसंद आया है। पिछले दिनों देहरादून आए नीति आयोग के सदस्य बिबेक देवराय ने सुझाव को सराहा और केंद्र सरकार से इसकी पैरवी करने का भरोसा दिया। वह आश्वस्त कर गए हैं कि केंद्र सुझाव को मान लेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नीति आयोग की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने नीति आयोग को इस संबंध पत्र लिखकर सुझाव दिया था।
प्रदेश सरकार के सुझाव से नीति आयोग पूरी तरह से सहमत है। आयोग के सदस्य बिबेक देवराय से भी इस पर चर्चा हो चुकी है। हम आश्वस्त हैं। केंद्र ने सुझाव माना तो इससे उत्तराखंड ही नहीं हिमाचल, जम्मू-कश्मीर समेत सभी पर्वतीय राज्यों को विशेष फायदा होगा।
- भूपाल सिंह मनराल, अपर सचिव, नियोजन