एनआईटी शिफ्ट करने पर फूटा संगठनों का गुस्सा, कुलसचिव ने कहा, श्रीनगर में ही चलेंगी कक्षाएं
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एनआईटी की कक्षाएं ऋषिकेश में संचालित किए जाने की बात को एनआईटी प्रशासन ने बेबुनियाद बताया है। एनआईटी प्रशासन का कहना है कि अस्थायी परिसर स्थानांतरित करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और न ही एमएचआडी से इस संबंध को उन्हें कोई निर्देश प्राप्त हुए हैं। कक्षाएं श्रीनगर में ही संचालित होंगी।
मंगलवार को मीडिया में एनआईटी अस्थायी परिसर के ऋषिकेश स्थानांतरण होने की खबरें प्रकाशित हुई थी, जिस पर विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था। एनआईटी प्रशासन ने अस्थायी परिसर स्थानांतरण की खबर पर अपनी सफाई दी है।
संस्थान के कुलसचिव कर्नल (सेनि.) सुखपाल ने बताया कि परिसर स्थानांतरण हमारे अधिकारी क्षेत्र में नहीं है। परिसर स्थानांतरण का अधिकार एमएचआरडी के स्तर का है। कहा कि संस्थान ने छात्रों के आंदोलन को देखते हुए विकल्पों पर चर्चा की जाती रही है, लेकिन निर्णय एमएचआरडी ही ले सकती है।
कुलसचिव ने कहा कि उन्हें एमएचआरडी से इस संबंध में कोई निर्देश भी नहीं मिला है। वहीं, निवर्तमान पालिकाध्यक्ष बिपिन मैठानी ने कहा कि एनआईटी के छात्र सुप्रीम कोर्ट में गए हैं। यदि राज्य सरकार ने यहां अपना मजबूत पक्ष नहीं रखा, तो एनआईटी हमारे हाथ से निकल जाएगी।
एनआईटी शिफ्टिंग के विरोध में फूटा गुस्सा
एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के अस्थायी कैंपस के ऋषिकेश में शिफ्टिंग की तैयारी के विरोध में विभिन्न संगठनों ने एनआईटी प्रशासन, केंद्र व राज्य सरकारों के पुतले फूंके। संगठनों ने इसके लिए मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक को जिम्मेदार मानते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
एनआईटी उत्तराखंड में विगत तीन अक्तूबर से छात्र कैंपस शिफ्टिंग की मांग के लिए कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। एनआईटी प्रशासन ने आंदोलन को देखते हुए विकल्प के तौर पर ऋषिकेश में एक शिक्षण संस्थान को चिह्नित किया है। मीडिया में यह खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा।
मंगलवार अपराह्न एक बजे प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले स्थानीय लोग एनआईटी गेट पर पहुंचे, जहां उन्होंने एनआईटी प्रशासन और केंद्र व राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए पुतला फूंका। इस मौके पर कहा गया कि स्थायी कैंपस के निर्माण हेतु जनता लगातार आंदोलन कर रही है। इसके विपरीत कैंपस को मैदानी क्षेत्र में शिफ्टिंग की बात की जा रही है।
पहाड़ में विकास अवरुद्ध हो जाएगा। पुतला फूंकने वालों में भूपेंद्र पुंडीर, प्रांतीय प्रवक्ता प्रदीप तिवाड़ी, जिला महामंत्री गणपति भट्ट, वीरेंद्र नेगी, राजेश जुगरान, मुकेश अग्रवाल और कमल रावत आदि शामिल थे। वहीं एनआईटी शिफ्टिंग के विरोध में प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले 16 नवंबर को मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जबकि तीन दिसंबर को महापंचायत का आयोजन होगा। मंच ने कहा कि राजनीतिक जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में नहीं घुसने दिया जाएगा। उधर, कांग्रेस एनआईटी गेट के समक्ष धरना देगी।