फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   nipah virus terror in uttarakhand

सैकड़ों चमगादड़ों की मौत, निपाह वायरस की आशंका से उत्तराखंड में दहशत

Thu, 24 May 2018 07:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 24 May 2018 07:08 AM IST
विज्ञापन
nipah virus terror in uttarakhand
Nipah Virus

पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में सैकड़ों चमगादड़ों के मृत मिलने से उत्तराखंड में दहशत का माहौल है। 

विज्ञापन


चमगादड़ों की मौत निपाह वायरस से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात की पुष्टी हो पाएगी। बुधवार को सिरमौर जिले के सीनियर सेकेंडरी स्कूल बर्मा पापड़ी में सैकड़ों चमगादड़ों के मृत मिलने से हड़कंप मच गया। स्कूल प्रशासन ने तत्काल प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद मौके पर आई संयुक्त टीम ने मरे चमगादड़ों के सैंपल लेने के बाद उन्हें गड्ढे में जला दिया। सैंपल को जांच के लिए जालंधर और पुणे स्थित लैब भेजा जाएगा।

अब पड़ोसी राज्य में इस घटना से सामने आने के बाद प्रदेश में हड़कंप मच गया है। बता दें कि राजधानी देहरादून में भी काफी संख्या में चमगादड़ पाए जाते हैं। जो इस मौसम में लीची पर लचके रहते हैं और पेड़ पर लगी लीची का स्वाद भी लेते हैं।
विज्ञापन

 

nipah virus terror in uttarakhand
nipah

बता दें कि केरल में निपाह वायरस से मौतों की सूचना के बाद सावधानी बरतने की हिदायतें जारी की गई हैं। वहीं उपायुक्त सिरमौर ललित जैन का कहना है कि मृत चमगादड़ों के सैंपल लिए गए हैं। सैंपलों को जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरल डिजिजिस जालंधर भेजा जाएगा। कुछ सैंपल पुणे लैब भी भेजे जा सकते हैं।

ललित जैन ने कहा कि निपाह वायरस जैसी कोई बात नहीं है। गर्मी की वजह से चमगादड़ों की मौत हुई है। इस बारे में विशेषज्ञों से भी राय ली गई है। इस वायरस से चमगादड़ नहीं मरते जबकि वह सिर्फ वायरस फैलाते हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर सैंपल लिए गए हैं।

क्या है निपाह वायरस
निपाह एक जूनोसिस वायरस है। यह चमगादड़ के जरिए फल व सब्जी में जाता है और इनका प्रयोग करने से यह इंसानों में आ जाता है। यह सीधा जानवरों के माध्यम से भी इंसानों में प्रवेश करता है। इसकी सबसे बड़ी समस्या है कि यदि इसके मरीज को उच्च स्तर के आइसोलेशन में न रखा जाए तो एक से दूसरे व्यक्ति को इसका शिकार होने में अधिक समय नहीं लगता।

यह अधिकांश उन लोगों को अपना शिकार बनता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। यह वायरस देश में पहली बार जनवरी 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आया था। यह अप्रैल 2007 में बंगाल के नादिया तक पहुंच गया था। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो इस वायरस का कोई स्थायी समाधान तो नहीं है, लेकिन रिबावैरिन गोली का प्रयोग कर सकते हैं।

nipah virus terror in uttarakhand
Nipah Virus

बीमारी के लक्षण
सांस लेने में समस्या, तेज बुखार, दिमाग में गर्मी, आलस आना, भ्रमित होना, सर्दी-जुखाम, बदन दर्द, सिर दर्द, उल्टी आना, पेद दर्द, खांसी आना, अचानक सांस फूलना, चक्कर आना, झटके आना, बेहोशी आना, कोमा में जाना

फेफड़े व तंत्रिका तंत्र पर अटैक
निपाह वायरस नया उभरता हुआ संक्रमण है। यह वायरस सीधे फेफड़े व तंत्रिका तंत्र पर अटैक करता है। अधिकतर मरीजों की मौत फेफड़े की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ने से होती है। इस वायरस की चपेट में आने के बाद बहुत से मरीजों को इलाज के दौरान आईसीयू व वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है।

इन बातों का रखें ध्यान
खजूर व नारियल का इस्तेमाल सावधानी पूर्वक करें। कटे फल के सेवन से बचना चाहिए। खाने की वस्तुएं चमगादड़ से संक्रमित न हों, नारियल से बनने वाली चीजों से परहेज करें, हाथ अच्छे से धोएं और बीमार मरीज से दूर रहें, बीमार मरीज के बिस्तर व बर्तन, कपड़े अलग रखें, बीमारी से मृत व्यक्ति के शव को छूने में सावधानी रखें।

डीएफओ देहरादून राजीव धीमान का कहना है कि इस तरह का कोई मामला अभी सामने नहीं आया है। लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। इस मामले में वन विभाग नजर रख रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed