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नौ साल का विष्णु है अपने गिरोह का 'सरदार'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 10 Oct 2013 08:31 PM IST
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नाम: विष्णु कुमार। पता: s/o अनिल कुमार नौनिया, ग्राम तालझारी, जिला साहबगंज झारखंड। उम्र: नौ साल। काम: महंगे स्मार्ट फोन चुराना। ओहदा: पांच सदस्यीय चोर गिरोह का ‘गुरु’।
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जी हां, खुड़बुड़ा चौकी पुलिस ने एक ऐसे मोबाइल चोर गिरोह को दबोचा है, जिसका मास्टरमाइंड बच्चा है। उसके इशारों पर काम करने वाले बाकी सदस्य उससे दोगुनी उम्र के हैं। यह गिरोह बीस लाख के मोबाइल फोन चुराकर भागने की फिराक में था, जब पुलिस ने उसे दबोच लिया।
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संदिग्ध बच्चे की तलाशी में मिले स्मार्ट फोन
बृहस्पतिवार दोपहर चौकी प्रभारी मनमोहन सिंह फोर्स के साथ मोती बाजार में चेकिंग कर रहे थे। इस दौरान एक संदिग्ध बच्चे की तलाशी ली गई तो उससे दो स्मार्ट फोन बरामद हुए।
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पूछताछ में उसने अपना नाम विष्णु बताया। उसने बताया कि उसके चार साथी रेलवे स्टेशन पर उसका इंतजार कर रहे हैं। पुलिस वहां पहुंची और सचिन कुमार (14), दुखू महतो (20), मेरवा महतो (21) और अजय कुमार मंडल (21) को गिरफ्तार कर लिया।
दून में अकसर वारदात के लिए आते
उनसे 56 मोबाइल फोन बरामद हुए। उन्होंने बताया कि वे हरिद्वार में किराये पर कमरा लेकर रहते हैं और दून में अकसर वारदात के लिए आते हैं। पूछताछ में पता चला कि वारदात के दौरान गिरोह को विष्णु ही लीड करता था। हर घटना की पूरी साजिश वही रचता था।
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कोर्ट में पेशी के बाद विष्णु और सचिन को बाल सुधार गृह भेज दिया गया, जबकि दुखू, मेरवा और अजय कुमार को जेल। एसएसपी केवल खुराना ने गिरोह को पकड़ने वाली टीम को ढाई हजार रुपये देने की घोषणा की।
‘बेटा चोरी में खूब नाम रोशन करना’
विष्णु ने बताया कि वह अपने गांव से एक साल पहले निकला था। गांव में कोई बच्चा स्कूल नहीं जाता, परिजन ही बच्चों को चोरी करने की ‘बेसिक ट्रेनिंग’ देते हैं।
विष्णु के मुताबिक ट्रेनिंग के दौरान कुछ ही दिन में वह इतना परफेक्ट हो गया कि परिजनों ने उसे ‘मैदान’ में उतार दिया। उसे गिरोह का लीडर बनाकर हरिद्वार भेजा गया। बताया कि घर से चलते वक्त उसकी मां ने आशीर्वाद दिया, ‘बेटा ज्यादा से ज्यादा चोरी कर खूब नाम रोशन करना।’
‘छोटा हूं ना, कोई जान नहीं पाता’
पूछताछ के दौरान वारदात के तरीके के सवाल पर विष्णु ने बेहद मासूमियत से कहा, ‘साहब, मेरी हाइट कम है ना। भीड़ भरे बाजारों में मैं किसी के बगल में चलने लगता हूं तो वह जान ही नहीं पाता। मौका मिलते ही शर्ट या पैंट की जेब से मोबाइल साफ कर लेता हूं।’
पचास हजार के पांच हजार
गिरोह के सदस्यों ने बताया कि वे महंगे स्मार्ट फोन रखने वालों को ही शिकार बनाते हैं। इन फोनों को वे अपने गांव जाकर दलालों को बेच देते हैं। पचास हजार के फोन के बदले उन्हें पांच हजार रुपये मिलते हैं।
फिर भी गिरोह का हर सदस्य हर महीने बीस से तीस हजार रुपये कमा लेता है। एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह अब तक कितने फोन झारखंड भेज चुका है।