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आपदा से 'भटकी' नदियों को निम ने दिखाई 'राह'

Fri, 19 Jun 2015 05:10 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 19 Jun 2015 05:10 PM IST
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nim maintain the flow of mandakini and saraswati.

उत्तराखंड सरकार अब केदारनाथ में मंदाकिनी और सरस्वती को आपदा पूर्व के स्वरूप में लाने की तैयारी में है।

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केंद्र सरकार के उपक्रम वापकोस को यह जिम्मा सौंपा जा रहा है। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) को केदारनाथ में दोनों नदियों के तट पर घाट बनाने का जिम्मा सौंपा जाएगा।

जून 2013 की आपदा में सरस्वती और मंदाकिनी का प्रवाह क्षेत्र एक हो गया था। दोनो नदियां पहले अलग-अलग और केदारनाथ को घेरे हुए बहती थीं। केदारनाथ में काम कर रहे निम ने दोनों नदियों को अपने प्रवाह क्षेत्र में वापस लाने में सफलता हासिल कर ली है।
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पर प्रदेश सरकार की कोशिश अब इन दोनों नदियों को मूल स्वरूप में लाने की है। मुख्यमंत्री हरीश रावत के मुताबिक यह काम केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अधीन उपक्रम वापकोस को दिया जा रहा है।
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केदारनाथ में मंदाकिनी नदी 2013 की आपदा से पहले मंदिर के बायीं तरफ बहती थी। आपदा के बाद यह दायीं ओर से बहने लगी। इसके साथ सरस्वती नदी भी मिल गई थी। कुछ समय पहले ही निम ने इन दोनों नदियों को अपनी मूल धाराओं में लाने में सफलता पा ली है।

मूल स्वरूप में लाना आसान काम नहीं

nim maintain the flow of mandakini and saraswati.

विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों नदियों को मूल स्वरूप में लाना आसान काम नहीं है। कारण यह है कि पहले मंदाकिनी जिस रास्ते बहती थी, वहां कई फीट गहराई भी थी। आपदा ने इस जगह को मलबे से भर दिया। मंदाकिनी को मूल स्वरूप में लाने के लिए इस मलबे को हटाना पड़ेगा।

इसी तरह सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्र को मूल रूप में लाने के लिए भी केदारनाथ की वर्तमान संरचना से छेड़छाड़ करनी पड़ सकती है। यह काम विशेषज्ञों को रास नहीं आ रहा।

नदियों को मूल धारा में लाने के लिए निम ने भी बहुत ज्यादा छेड़छाड़ केदारनाथ में स्लोप के साथ नहीं की। निम ने ब्लॉक लगाकर मंदाकिनी के प्रवाह की दिशा बदली।

धीरे-धीरे नदी मूल प्रवाह क्षेत्र में लौट आई। इसी तरह सरस्वती नदी का प्रवाह क्षेत्र बदला गया। इस काम में निम को आईआईटी रुड़की और अन्य विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ी।

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