Nh-74 घोटोले में आरोपी आईएएस चंद्रेश की बढ़ी मुश्किलें, बहाली के बाद भी पदोन्नति पर लटकी तलवार
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एनएच 74 घोटाले के आरोपी आईएएस चंद्रेश कुमार यादव के प्रभारी सचिव बनने पर संशय बन गया है। निलंबन से बहाल होने के बाद भी उनका पदोन्नति का रास्ता साफ नहीं हुआ है।
1 जनवरी से पदोन्नत होने वाले वर्ष 2006 बैच के अफसरों की सूची में चंद्रेश यादव शामिल हैं, लेकिन नियमों के तहत विभागीय जांच के दायरे में आने वाला आईएएस पदोन्नत नहीं हो सकता है। चूंकि चंद्रेश के खिलाफ विभागीय जांच की न्यूनतम समय अवधि दो माह है, ऐसे में उन्हें क्लीन चिट मिलने तक अपर सचिव पद पर ही रहना होगा।
प्रदेश में तैनात आईएएस अधिकारियों को 12 वर्ष की सेवाएं पूरी करने के बाद प्रभारी सचिव के रैंक पर पदोन्नत किया जाता है। हालांकि सचिव पद पर तैनाती 16 वर्ष की सेवाएं पूर्ण करने के बाद ही मिलती हैं।
इस व्यवस्था के तहत 1 जनवरी, 2019 को 12 वर्ष की सेवाएं पूरी करने वाले वर्ष 2006 बैच के चार आईएएस आशीष जोशी, चंद्रेश कुमार यादव, ब्रिजेश संत और भोपाल सिंह मनराल शामिल हैं। आईएएस चंद्रेश को छोड़ अन्य तीन अधिकारियों का पदोन्नति के लिए रास्ता साफ है।
चूंकि, चंद्रेश एनएच 74 भूमि अधिग्रहण घोटाले के आरोपी हैं और उनके खिलाफ आईएएस शैलेश बगोली जांच कर रहे हैं। ढाई माह के निलंबन के बाद बहाल होने के बावजूद उन्हें अभी क्लीन चिट नहीं मिली है।
जांच के लिए समयावधि दो माह है, जिसके बाद जांच रिपोर्ट का परीक्षण होना है। ऐसे में 1 जनवरी से प्रभारी सचिव बनने वालों की सूची से चंद्रेश बाहर रहेंगे।