गंगा के लिए हरिद्वार नगर निगम पर बिफरी NGT
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अवैध होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं के लिये एक बार फिर से हरिद्वार नगर निगम को फटकार लगाई है। ग्रीन पैनल ने निगम की ओर से पेश काउंसिल को कहा कि यदि यह सभी बिना अनुमति और एसटीपी के संचालित हो रहे हैं तो गंगा में गिरने वाले सीवेज के जिम्मेदार आप हैं। बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई में हमें यह आंकड़े नहीं कार्रवाई का दस्तावेज चाहिये। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान निगम की ओर से पेश काउंसिल ने बताया कि कुल 1083 होटल, आश्रम और धर्मशाला मौजूद हैं। इनमें कुल 396 होटल, 431 आश्रम और 256 धर्मशाला हैं।
महज 27 होटल के पास है सेप्टिक टैंक
ग्रीन बेंच ने पूछा कि कुल होटल में कितने सेप्टिक टैंक या एसटीपी से जुड़े हुए हैं। इस पर निगम काउंसिल ने जानकारी दी कि महज 27 होटल सेप्टिक टैंक से और 3 होटल एसीटीपी लाइन से जुड़े हुए हैं।
इस पर ग्रीन बेंच ने फटकार लगाते हुए कहा कि सारा सीवेज गंगा में आप लोगों के जरिये ही छोड़ा जा रहा है। आखिर आज तक आप लोगों ने क्या कार्रवाई की है। कुल 1000 से ज्यादा इन संस्थाओं में करीब सभी के पास सीवेज शोधन यंत्र नहीं है।
किसी के पास नहीं है प्रदूषण बोर्ड की मंजूरी
मालूम हो कि हाल ही में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरिद्वार और ऋषिकेश के भीतर चलने वाले 1083 होटल, आश्रम और धर्मशालाओं की सूची पेश की थी। इसके बाद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि किसी के पास भी प्रदूषण बोर्ड की मंजूरी नहीं है।