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एनजीटी ने पूछा, नैनी झील के संरक्षण के लिए क्या किया? दो माह के अंदर मांगी रिपोर्ट

Sun, 14 Apr 2019 05:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 14 Apr 2019 05:30 AM IST
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ngt asked about naini lake conservation nainital
फाइल फोटो

नैनी झील के लगातार गिर रहे जलस्तर को रोकने और इसके रिचार्जिंग क्षेत्रों को संरक्षित रखने को लेकर अब तक किए गए कार्यों और नगर की धारण क्षमता पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने तथ्यात्मक और एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। सचिव शहरी विकास, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएम नैनीताल को दो महीने के अंदर संयुक्त रूप से यह रिपोर्ट देनी होगी। एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और विशेषज्ञ सदस्य नागिन नंदा की बेंच ने शुक्रवार को गैर सरकारी संस्था फ्रेंड्स की याचिका पर यह रिपोर्ट मांगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। उधर, डीएम विनोद सुमन ने कहा कि इस संबंध में निर्देश के अनुरूप त्वरित कार्यवाही की जाएगी। 

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संस्था की ओर से याचिका दायर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने याचिका में कहा था कि नैनी झील के संरक्षण को लेकर पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद नैनी झील को रिचार्ज करने वाले सूखाताल क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जे जारी रहे और निर्माण कार्यों का मलबा झील को जाने वाले नालों में डाला जाता रहा, जिससे झील का जलस्तर लगातार गिरता रहा। यहां तक कि बीते वर्षों में झील का जलस्तर शून्य से भी कई फीट नीचे चला गया।
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इन पर तत्कालीन प्रशासन और झील विकास प्राधिकरण ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ ही वर्षों में नैनीताल की धारण क्षमता के विपरीत पर्यटन में बेतहाशा वृद्धि हुई है। भारी तादाद में पर्यटकों के आने से नगर में प्रदूषण बढ़ा, अनियंत्रित निर्माण हुए और झील का अत्यधिक दोहन हुआ, जिससे नगर के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया। 
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पिछले निर्देर्शों का नहीं हुआ असर
एनजीटी की ओर से पिछले साल अक्तूबर में हिल स्टेशनों की धारण क्षमता के आकलन की आवश्यकता संबंधी निर्देश दिए गए थे लेकिन इन निर्देशों का भी कोई असर नहीं दिखा। याचिका में कहा गया था कि प्राकृतिक जलस्रोतों के आसपास निर्माण कार्यों से अधिकतर स्रोत सूख गए या इनका प्रवाह घट गया। अधिवक्ता आकाश ने बताया कि इन समस्याओं से संस्था ने पूर्व में पर्यावरण मंत्रालय को भी अवगत कराया था, जिस पर मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन वह रिपोर्ट भी नहीं दी गई।

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