उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू पर एनजीटी ने लगाया 46 लाख का जुर्माना
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एनजीटी ने उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बीएस सिद्धू को अवैध तरीके से देहरादून के वीरगिरवाली गांव में आरक्षित वन भूमि खरीदने और साल के 25 वृक्षों को काटने का दोषी पाया है। प्रधान पीठ ने इसके लिए सिद्धू पर 46 लाख 14 हजार 960 रुपये का जुर्माना लगाया है।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसले में कहा कि जुर्माने की यह राशि एक महीने के भीतर जिला वन अधिकारी के पास जमा कराया जाना चाहिए। जुर्माने की इस राशि का इस्तेमाल पेड़-पौधे की कमी वाले क्षेत्र में देसी प्रजाति के पौधे लगाकर पर्यावरण की बेहतरी के लिए किया जाएगा।
बीएस सिद्धू का कबूलनामा
एनजीटी में 18 मई, 2017 को बीएस सिद्धू ने स्वीकार किया था कि वे जंगल की जमीन खरीदने के लिए दो लोगों से मिले थे, जिन्होंने नत्थूराम के नाम पर इन्हें जमीन बेचने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद इन्होंने वह आरक्षित वन भूमि खुद ही नियमों का उल्लंघन कर खरीद ली। इसके अलावा 3 सितंबर, 2015 को भी सिद्धू ने यह बयान दर्ज कराया कि उन्हें जंगल में रहने और घर बनाने की प्रबल इच्छा थी इसलिए उन्होंने यह काम किया।
फर्जी नत्थूराम से जमीन खरीदी व लैंड यूज बदला
एनजीटी बार एसोसिएशन का आरोप है कि पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू ने देहरादून में 20 नवंबर, 2012 को वन क्षेत्र में नत्थूराम नाम के काल्पनिक व्यक्ति से प्लॉट खरीदा और 13 मार्च, 2013 को उसका लैंड यूज बदल दिया। साथ ही वन्य क्षेत्र में मौजूद कीमती साल के पेड़ों को अवैध तरीके से कटवाया।
यहां से शुरू हुई थी मामले की छानबीन
9 मार्च, 2013 को मसूरी वन विभाग को संबंधित क्षेत्र में साल के चार पेड़ और 18 मार्च, 2013 को 21 पेड़ों को अवैध तरीके से काटे जाने की सूचना मिली। जांच में पाया गया कि यह जमीन बीएस सिद्धू ने खरीदी है। इसी दौरान सिद्धू को डीजीपी बना दिया गया था।