शर्मनाक: 108 नहीं आई तो जीप में करानी पड़ी महिला की डिलीवरी
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जीवनदायिनी माने जाने वाली 108 सेवा की वजह से अब लोगों की जान आफत में पड़ती जा रही है। इस बार 108 नहीं मिलने की वजह से मालासीमा गांव में एक नवजात की जान चली गई।
यहां फोन करने के बाद भी जब 108 सेवा उपलब्ध नहीं हुई तो गांव के लोग प्रसव पीड़िता को दो किमी तक डोली पर बैठाकर लाए और वहां से एक निजी जीप से महिला को थल अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन जीप में ही महिला का प्रसव हो गया और बच्चे की मौत हो गई।
थल के महिला अस्पताल में वर्ष 2004 से डॉक्टर नहीं है। महिला की देखरेख एएनएम और स्टाफ नर्स कर रही हैं। बताया गया कि मालासीमा गांव के उमेद सिंह की पत्नी हंसा देवी को बुधवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई।
उमेद सिंह ने तत्काल इसकी सूचना आशा कार्यकर्ता भावना भंडारी को दी। आशा कार्यकर्ता ने 108 आपात वाहन को फोन किया। वहां से जवाब मिला कि थल की 108 सेवा तो बंद है, इसलिए डीडीहाट से आपात सेवा को भेजा जा रहा है।
सुबह आठ बजे से इंतजार में बैठे लोगों ने आखिरकार दस बजे महिला को जीप से अस्पताल पहुंचाने का फैसला लिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और बच्चे को नहीं बचाया जा सका।
हंसा देवी गंभीर हालत में थल अस्पताल में भर्ती है। इधर, राज्य सरकार ने 108 आपात सेवा के लिए छह करोड़ रुपये जारी करने का आदेश तो दिया है, लेकिन इस धनराशि के पहुंचने में कम से कम एक सप्ताह का समय लग जाएगा।