केदारनाथ आपदाः संस्थाओं की ‘आपदा राहत’ भी गायब!
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केदारनाथ आपदा राहत मामले में उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार अब एक और नए बखेड़े में उलझती नजर आ रही है।
गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र लिखकर जून 2013 की आपदा के बाद संगठनों और संस्थाओं की ओर से राहत के लिए की गई घोषणाओं का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
किशोर का कहना है कि कई सामाजिक संस्थाओं और अन्य लोगों ने गांवों को गोद लेने, राहत के लिए धनराशि देने का ऐलान किया था, लेकिन धरातल पर कोई काम होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इन सभी के नाम और घोषणा को सार्वजनिक करें।
किशोर ने पत्र में विशेष रूप से हंस फाउंडेशन के भोले महाराज का जिक्र किया है। कहा कि भोले महाराज ने उस समय 100 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था।
जून 2013 की आपदा को पूरे होने जा रहे दो साल
इसके अलावा कई और संस्थाओं और धार्मिक संगठनों ने भी गांवों को गोद लेने, पुनर्निर्माण में आर्थिक रूप से सहयोग करने का इरादा जाहिर किया था। किशोर का कहना है कि जून 2013 की आपदा को दो साल पूरे होने जा रहे हैं।
लेकिन जिस तरह से घोषणाएं की गई थीं वे धरातल पर नहीं दिखाई दे रही हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इन घोषणाओं को सार्वजनिक करवाए, जिससे लोगों को पता चल सके कि ये किनकी घोषणाएं थीं और किस हद तक इन्हें अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
यह पत्र ऐसे समय में मुख्यमंत्री को लिखा गया है जब आपदा राहत घोटाले को लेकर राज्य में सियासी बवाल मचा हुआ है। विपक्ष ने आपदा राहत को लेकर सीबीआई जांच को मुद्दा बनाया है। कुछ लोग श्वेत पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
यह मामला सरकार पर भी भारी पड़ सकता है। इससे यह भी मांग उठ सकती है कि सरकार अपनी राहत घोषणाओं के ब्योरे को भी सार्वजनिक करे। किशोर ने यह पत्र मीडिया को सार्वजनिक न करने की साफ हिदायत भी दी है।