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खुशखबरीः पहाड़ को नसीब होंगी सुगम राहें
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 22 Feb 2014 01:05 PM IST
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पहाड़ की दुर्गम राहों पर मुसीबत झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। आठ जिलों की 14 सड़कों की राह से वन भूमि का रोड़ा हट गया है।
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वन भूमि हस्तांतरण न होने के कारण लंबे समय से इन सड़कों का निर्माण अटका था, जिससे पहाड़वासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से वन भूमि हस्तांतरण के 15 मामलों को स्वीकृति मिलने के बाद प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है।
इनमें एक प्रस्ताव राजकीय महाविद्यालय का है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इन सड़कों पर काम शुरू हो जाएगा। आपदा की मार से उबरने की कोशिश कर रहे पहाड़ के लिए यह फैसला अहम साबित होगा।
ऐसे मिलती है स्वीकृति
वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वन भूमि पर किसी भी निर्माण कार्य के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति आवश्यक है। जांच के बाद डीएफओ के मार्फत प्रपोजल शासन में भेजा जाता है।
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शासन से अनुमोदन होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाता है। केंद्र सरकार पहले सैद्धांतिक अनु़मति देती है, जिसके बाद विधिक अनुमति मिलती है। इसके बाद ही राज्य सरकार शासनादेश जारी करती है। यह लंबी प्रक्रिया है, जिसमें वक्त लगता है।
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दो प्रपोजल दिल्ली भेजे
बृहस्पतिवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय में हुई राज्य सलाहकार समूह बैठक में वन भूमि हस्तांतरण के सात मामलों पर विचार के बाद दो को एप्रूवल दिया गया था।
इनमें पिथौरागढ़ के ‘हलिया डूब-दसौली-नाचनी’ मोटर मार्ग निर्माण और चमोली में ‘कुरकुती-गमशाली-नीती’ मोटर मार्ग का प्रोजेक्ट शामिल है। इन प्रस्तावों को केंद्रीय कार्यालय के पास भेज मंजूरी के लिए भेजा गया है।