उत्तराखंड: सरकारी अस्पतालों में अब नहीं होगी दवा की किल्लत, ये है सरकार की योजना
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प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त में दी जाने वाली दवाइयों की अब किल्लत नहीं होगी। नई दवा क्रय नीति के तहत बार-बार दवा खरीदने की प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी और दवा खत्म होते ही स्टॉक आ जाएगा। नई नीति में मात्रा नहीं बल्कि मू्ल्य अनुबंध के आधार पर दवा खरीदी जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए नई नीति बनाई है, जो प्रदेश में एक अक्तूबर से लागू कर दी गई है। वर्ष 2015 में सरकार ने दवाइयों और उपकरणों की खरीद के लिए अलग-अलग नीति लागू की थी।
इसके तहत दवा खत्म होने पर ही विभाग दवाइयां खरीदता था। इसके लिए निविदा प्रक्रिया पूरी करने की शर्त थी। निविदा में काफी समय लग जाने के कारण अस्पतालों में लंबे समय तक दवा नहीं पहुंच पाती थी। इसे देखते हुए सरकार ने पुरानी नीति में संशोधन कर दवा क्रय की प्रक्रिया को सरल कर दिया है।
अब स्वास्थ्य विभाग दवा क्रय करने के लिए कंपनियों के साथ मूल्य अनुबंध करेगा। इसके अनुसार दो साल तक दवाइयों उसी दर पर खरीदी जाएंगी, जो एक बार तय हो चुकी हैं। ऐसे में अस्पतालों में दवाइयां खत्म होने पर अनुबंधित कंपनी तत्काल दवा की आपूर्ति कर देगी।
मरीजों को बाजार से खरीदने पड़ती थीं दवाइयां
सरकारी अस्पतालों में अब तक दवा खत्म होने पर कई-कई दिनों तक दवा का स्टॉक नहीं आ पाता था। ऐसे में मरीजों को कई बार बाहर से खुद दवा खरीदनी पड़ती थी। नई व्यवस्था के तहत दवा आसानी से उपलब्ध होने पर अब मरीजों को बाहर से दवाइयां नहीं खरीदनी पड़ेंगी।
नई नीति में दवाओं की खरीद मूल्य अनुबंध के आधार पर की जाएगी। इससे अब अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध रहेंगी।
- डॉ.अमिता उप्रेती, स्वास्थ्य महानिदेशक