{"_id":"3b2b7e3cba83a406cff88f106614e05d","slug":"new-land-slide-zone-on-the-way-of-kedarnath","type":"story","status":"publish","title_hn":"संभलकर, अभी केदारनाथ जाने में जरा रिस्क है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संभलकर, अभी केदारनाथ जाने में जरा रिस्क है
अमर उजाला, प्रवेश कुमारी, देहरादून
Updated Sun, 15 Sep 2013 01:11 PM IST
विज्ञापन
केदारनाथ स्थित चोराबाड़ी ग्लेशियर के लिए निकले वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने गौरीकुंड पार कर लिया है।
विज्ञापन
पढ़ें, जान हथेली पर रखकर जाएं हेमकुंड साहिब
मुश्किल रास्तों को पैदल पार कर रही टीम पहले जहां डेढ़ किमी की दूरी आधे घंटे में पूरी कर रही थी, अब उसे इसमें तीन घंटे लग रहे हैं।
रास्ते इस कदर कट गए हैं कि 50 से 100 मीटर पार करने के बाद चढ़ाई करनी पड़ रही है, फिर इतनी ही उतराई। बारिश की वजह से भू-स्खलन हुआ है। इसमें से कई भू-स्खलन नए हैं।
विज्ञापन
टीम का नेतृत्व कर रहे वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के ग्लेशियोलाजिस्ट डा. डीपी डोभाल ने फोन पर बताया कि लैंड स्लाइड के चिन्हीकरण के साथ ही किस तरह से इन लैंड स्लाइड का ट्रीटमेंट हो सकता है, इसका एक डाटा तैयार किया जाएगा।
विज्ञापन
पढ़ें, केदारनाथ पूजा पर गरमाई सियासत
वैज्ञानिकों का दौरा तकरीबन 10 दिन का है। वह चोराबाड़ी ग्लेशियर के पास स्थापित ऑब्जरवेटरी का निरीक्षण करने के साथ ही आपदा में बहे अन्य टावर को पुर्नस्थापित किए जाने के संबंध में फैसला लेंगे।
फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...