नए राज्यपाल ने शपथ ग्रहण से पहले की हवन
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उत्तराखंड के छठे राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत ने शपथ लेने से पहले राजभवन में हवन की। फिलहाल ओल्ड गेस्ट हाउस में आकर ठहरे डॉ. पॉल ने आते ही सचिव अरुण ढौंढियाल से हवन की तैयारियों को लेकर पूछताछ की। सुबह हवन के बाद राज्यपाल ने राजभवन में प्रवेश किया।
बुधवार को राज्यपाल बदलने की आहट के साथ ही राजभवन का मिजाज भी बदला सा नजर आया। डॉ. पॉल के कड़े रुख ने राजभवन सचिवालय से जुड़े अधिकारियों को न सिर्फ सतर्क किया है बल्कि भविष्य के बदलाव के संकेत भी दिखने लगे हैं। राज्यपाल ने कार से उतरते ही अभिवादन स्वीकार किया और कुछ ही देर में वहां मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों से अपने कामकाज के लिए जाने को कह दिया। उन्होंने कहा कोई जरूरत होगी तो बुला लेंगे।
राजभवन कर्मचारी यूं तो अजीज कुरैशी से भी खूब डांट फटकार खाए हैं लेकिन उनकी अपेक्षा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी डॉ. पॉल के कड़क स्वभाव ने कुछ अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। नए राज्यपाल की आवभगत में कोई कमी न हो इसके लिए उनके आने के कुछ मिनट पहले ही नए गद्दे आदि मंगाए गए। वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी हवन की व्यवस्थाओं में लगे हुए थे।
दूसरे पुलिस अधिकारी हैं पॉल
डॉ. केके. पॉल राज्य के दूसरे पुलिस अधिकारी होंगे जो उत्तराखंड के राज्यपाल बने हैं। इससे पूर्व डॉ. बीएल.जोशी पहले राजस्थान फिर केंद्रीय पुलिस से सेवानिवृत्त हुए थे।
67 वर्षीय डॉ. पॉल अखिल भारतीय पुलिस सेवा के 1970 बैच के अधिकारी रहे हैं। जनवरी 2004 से जुलाई 2007 तक दिल्ली पुलिस के कमिश्नर पद पर सर्वाधिक लंबा कार्यकाल पूरा किया। जुलाई 2007 से संघ लोक सेवा आयोग में संवैधानिक पद पर सदस्य के रूप में पांच वर्ष और छह माह तक अपनी सेवाएं दी।
डॉ. पॉल को इंदिरा गांधी हत्या मामले की जांच के लिए विशेषतौर पर चुना गया था। इसके अलावा क्रिकेट मैच फिक्सिंग, दिल्ली बम विस्फोट, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी अपराधों की जांच का दायित्व निभाया था।
इन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री एस बेअंत सिंह की हत्या के आरोपी जगतार सिंह तारा को गिरफ्तार करके आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा के पूरे नेटवर्क को 2005 में पूरी तरह से ध्वस्त किया। तहलका मामले की जांच में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
जांच के लिए गठित विशेष जांच दल वेंकटस्वामी जांच आयोग और फूंकन जांच आयोग के निदेशक के रूप में कार्य किया। दिल्ली पुलिस के आधुनिकीकरण व नवीनतम तकनीकों के वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग की व्यवस्था का श्रेय इन्हें जाता है।