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New Criminal Law: नए कानूनों पर बोले सीएम धामी- अनुशासन, निष्पक्षता और न्याय...ये भारत की परंपराएं हैं

Mon, 01 Jul 2024 09:57 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 01 Jul 2024 09:57 PM IST
सार

सोमवार से पूरे देश में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम इन तीन नए कानूनों को लागू कर दिया गया है।

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New Criminal Law CM Dhami said Discipline, fairness and justice these are the traditions of India
सीएम धामी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस मुख्यालय में सोमवार को तीन नए आपराधिक कानूनों की औपचारिक शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अनुशासन, निष्पक्षता और न्याय ये भारत की प्राचीन परंपराएं हैं। डेढ़ सौ साल पुराने अंग्रेजों के कानून अब इतिहास बन गए हैं। अब जो हमारी न्याय प्रणाली है वह हमने खुद अपने लिए हमारी संसद में बनाई है। स्वदेशी न्याय प्रणाली से लोगों को जल्द न्याय मिलेगा। इसके अलावा तकनीकी के प्रयोग से पहले से अधिक पारदर्शिता आएगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विवेचना अधिकारियों को टैबलेट बांटे और विवेचना से संबंधित आईओ एप का उद्घाटन भी किया।

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बता दें कि सोमवार से पूरे देश में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम इन तीन नए कानूनों को लागू कर दिया गया है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री के संबोधन को सभी 13 जिलों की पुलिस लाइनों में पुलिसकर्मियों ने भी लाइव देखा। मुख्यमंत्री ने तीनों कानूनों के लागू होने पर सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नए कानून न्याय की अवधारणा को मजबूत करेंगे और न्याय मिलने की प्रक्रिया को अधिक सरल व सुलभ बनाएंगे।
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ये तीनों कानून देश के हर नागरिक की स्वतंत्रता, मानव अधिकार और सबके साथ समान व्यवहार को सुनिश्चित करेंगे। ये कानून गुलामी की मानसिकता को मिटाने और औपनिवेशिक कानूनों से मुक्ति दिलाने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके साथ इनसे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ कानून व्यवस्था को भी और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
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नए कानूनों में ई-एफआर की सुविधा दी गई है। पीड़ित अब कहीं से भी अपने मुकदमों को दर्ज करा सकता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हमारे कानून आतंकवाद, संगठित अपराधों और आर्थिक अपराधों को पूरी तरह परिभाषित करेंगे। नए कानूनों में मॉब लिंचिंग को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, भगोड़ों की गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। उत्तराखंड में इनके क्रियान्वयन के लिए पुलिस को 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनसे विभिन्न उपकरणों की खरीद और सुविधाएं जुटाई जाएंगी। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि पूरे देश ऐतिहासिक निर्णय का क्रियान्वयन हो रहा है। अंग्रेजी शासनकाल से लेकर आज तक पुराने कानून चले आ रहे थे, जिनसे अब देश को मुक्ति मिल गई है। इनसे तकनीकी का प्रयोग कर त्वरित न्याय दिलाया जा सकेगा। डीजीपी अभिनव कुमार ने कहा कि आजादी के बाद यह हमारी न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन है। दिसंबर 2023 में हमारी संसद में ये तीनों कानून पास किए गए थे। एक जनवरी को इन्हें एक जुलाई से लागू करने का फैसला लिया गया था। इसके लिए उत्तराखंड पुलिस ने विभिन्न स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी थी। करीब 24 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

सीसीटीएनएस में जोड़े गए 23 पेज
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के लिए सीसीटीएनएस और एससीआरबी टीम ने एनसीआरबी से आए 23 नए पेजों को सॉफ्टवेयर में जोड़ा है। ये विवेचना अधिकारियों को तकनीकी का प्रयोग करते हुए निष्पक्षता से जांच करने में सहायक होंगे। कार्यक्रम में जिलों के अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने भी तीन नए कानूनों पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, गृह सचिव दिलीप जावलकर, एडीजी अभियोजन पीवीके प्रसाद, एडीजी सीबीसीआईडी वी मुरुगेशन, एडीजी कानून व्यवस्था एपी अंशुमान आदि अधिकारी मौजूद रहे।

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