'सेक्स पावर' के लिए विदेश से पहुंच रहे लोग
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पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र में जिम्मा और पुल्का ग्लेशियर में यारसागंबू खोजने जा रहे लोग जैव विविधता को तेजी से नुकसान पहुंचा रहे हैं।
यारसागंबू के लिए नेपाल से भी इन इलाकों में भारी संख्या में लोग पहुंच गए हैं।
जिला प्रशासन भले ही बेखबर हो, लेकिन इस इलाके की स्टडी रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले कस्तूरा मृग, थार, रेड फॉक्स की संख्या लगातार कम हो रही है।
पक्षियों पर मंडरा रहा संकट
स्नो पार्टन, मोनाल, ग्रेंडेला, ट्रैगोपान समेत अन्य छोटी प्रजातियों की पक्षियों पर संकट मंडरा रहा है। गर्जु और बरल जैसे जीव अब नहीं दिखते।
रात्पा के पेड़ों की संख्या कम हो रही है। यारसागंबू के लिए नेपाल से भी इन इलाकों में भारी संख्या में लोग पहुंच गए हैं। ये लोग दिन में यारसागंबू की खोज करते हैं और रात में जीव-जंतुओं को मौत के घाट उतारते हैं।
पर्यावरण क्षेत्र में काम करने वाली पिथौरागढ़ की मोनाल संस्था की टीम ने 20 मई से 21 जून तक जिम्मा और पुल्का ग्लेशियर में जाकर यारसागंबू खोदने से पैदा रहे संकट का अध्ययन किया था।
सिंथेटिक से बनी चीजें भी पहुंची ग्लेशियर
टीम के सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार को उपलब्ध करा दी है।
मोनाल के अध्यक्ष बृजेश धर्मशक्तू और सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि जिस समय लोग यारसागंबू के लिए जाते हैं उस समय उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों और पक्षियों का प्रजनन काल रहता है।
यही इनके लिए सबसे बड़े खतरे का कारण भी रहता है। धर्मशक्तू और पंवार ने बताया कि जिम्मा और पुल्का ग्लेशियर 3500 मीटर की ऊंचाई पर है।
उन्होंने बताया कि इतनी ऊंचाई पर यारसागंबू खोजने के लिए गए लोगों ने भारी मात्रा में सिंथेटिक से बनी चीजें भी पहुंचा दी हैं।
पक्षियों और वनस्पतियों को नुकसान
लोग यारसागंबू के अनियंत्रित दोहन के साथ-साथ जिस तरह वन्य जीवों, पक्षियों और वनस्पतियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे।
मोनाल टीम के धर्मशक्तू, पंवार के अलावा राजू भंडारी, केदार पांगती, पुष्कर आर्या ने इन स्थानों पर सफाई का अभियान चलाया। वहां से कचरे को उठाकर नष्ट किया।
रेन पक्षी का अस्तित्व खतरे में
उच्च हिमालयी क्षेत्र में रेन नाम का प्यारा पक्षी मिलता है। गौरेया की तरह दिखने वाले रेन पक्षी की संख्या भी कम हो रही है।
मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार रेन पक्षी की चहचहाट कम सुनाई दी। स्नो पार्टन, मोनाल जैसे पक्षियों की संख्या भी कम हो रही है।