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पेयजल के लिए इस्तेमाल हो रहे सिंचाई के ट्यूबवेल, न हलक हो पा रहे तर, न खेत हो रहे नम
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दून में पेयजल की किल्लत से बड़ी संख्या में खेतों की सिंचाई करने वाले ट्यूबवेलों को इस्तेमाल पेयजल के लिए किया जा रहा। इससे न तो लोगों के हलक तर हो पा रहे और न ही खेती के लिए किसानों को पर्याप्त पानी मिल पा रहा। पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए ट्यूबवेलों के इस्तेमाल होने से ट्यूबवेल पर लोड बढ़ जाता है और आए दिन फुंकने से परेशानी दोगुनी हो जाती है।
दरअसल, दून में गर्मी बढ़ते ही पेयजल का संकट खड़ा हो जाता है। संकट इतना गहरा जाता है कि जलसंस्थान और जल निगम के ट्यूबवेल हांफने लगते हैं और लोगों तक पानी पहुंचाना दोनों विभागों को भारी पड़ जाता है। संकट गहराने के बाद आखिरकार जलसंस्थान और जल निगम को सिंचाई विभाग की शरण में जाना पड़ता है और खेतों की सिंचाई के लिए बने ट्यूबवेलों को पेयजल के इस्तेमाल के लिए देने की गुहार लगानी पड़ती है। वर्तमान में दून में सिंचाई विभाग के दून में करीब 206 ट्यूबवेल हैं, जिन्हें केवल खेती की सिंचाई में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वर्तमान में करीब 55 सिंचाई वाले ट्यूबवेलों का इस्तेमाल सिंचाई संग पेयजल के लिए किया जा रहा है।
अकेले जल निगम की ओर से 15 से अधिक और बाकी जलसंस्थान की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। सिंचाई वाले ट्यूबवेलों का इस्तेमाल पेयजल के लिए करने से न तो लोगों को पर्याप्त पानी मिल पा रहा और न ही खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी। इसका कारण यह है कि खेती और पेयजल दोनों के लिए ट्यूबवेलों का इस्तेमाल होने से ट्यूबवेलों पर लोड बढ़ जाता है। गर्मियों में लोड बढ़ने से अक्सर ट्यूबवेलों की मोटर फुंक जाती है और ट्यूबवेलों में खराबी आ जाती है। मोटर बदलने और ट्यूबवेल में अन्य खराबी ठीक करने में लगभग तीन से चार दिन लग जाते हैं। इससे न तो लोगों को पानी मिल पाता है और न खेतों को पानी।
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आर्केडिया क्षेत्र में पांच ट्यूबवेल से पेयजल आपूर्ति
दून में अकेले आर्केडिया क्षेत्र में सात सिंचाई ट्यूबवेल पेयजल के लिए इस्तेेमाल हो रहे हैं। बनियावाला, पीतांबरपुर, श्यामपुर, ठाकुरपुर, बड़ोवाला स्थित सिंचाई के ट्यूबवेल पेयजल के साथ ही सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे यहां लोगों को न तो पर्याप्त पानी उपलब्ध हो पा रहा और न किसानों के खेतों के लिए पर्याप्त पानी। यह हाल तब है, जब जल निगम के इस क्षेत्र में 15 नए ट्यूबवेल तैयार हैं, लेकिन अभी तक उन्हें चालू नहीं किया गया है।
सिंचाई के ट्यूबवेल पेयजल के लिए इस्तेमाल होने से किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे किसान परेशान हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन से आग्रह किया गया कि सिंचाई के ट्यूबवेलों को इस्तेमाल पेयजल के लिए न किया जाए। पेयजल निगम और जलसंस्थान अपने ट्यूबवेलों का इस्तेमाल करें।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता
दून में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत है। लिहाजा लोगों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग से उनके ट्यूबवेलों का पेयजल के लिए इस्तेमाल करने का आग्रह किया जाता है। कोशिश की जाती है कि इससे खेती भी प्रभावित न हो और लोगों को पर्याप्त पानी भी उपलब्ध हो सके।
- निलिमा गर्ग, महाप्रबंधक, जलसंस्थान
जिन क्षेत्रों में पेयजल का संकट हैं, वहां जलसंस्थान के आग्रह पर सिंचाई के ट्यूबवेलों को पेयजल के इस्तेेमाल के लिए दिया जाता है। समस्या यह आती है कि ज्यादा इस्तेमाल से ट्यूबवेलों पर लोड बढ़ जाता है और मोटर फुंकने और ट्यूबवेल में तकनीकी खराबी आ जाती है। ठीक करने का जिम्मा सिंचाई विभाग का होता है, इसलिए दिक्कत आती है।
- वीएस पाल, एसई, सिंचाई विभाग
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दरअसल, दून में गर्मी बढ़ते ही पेयजल का संकट खड़ा हो जाता है। संकट इतना गहरा जाता है कि जलसंस्थान और जल निगम के ट्यूबवेल हांफने लगते हैं और लोगों तक पानी पहुंचाना दोनों विभागों को भारी पड़ जाता है। संकट गहराने के बाद आखिरकार जलसंस्थान और जल निगम को सिंचाई विभाग की शरण में जाना पड़ता है और खेतों की सिंचाई के लिए बने ट्यूबवेलों को पेयजल के इस्तेमाल के लिए देने की गुहार लगानी पड़ती है। वर्तमान में दून में सिंचाई विभाग के दून में करीब 206 ट्यूबवेल हैं, जिन्हें केवल खेती की सिंचाई में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वर्तमान में करीब 55 सिंचाई वाले ट्यूबवेलों का इस्तेमाल सिंचाई संग पेयजल के लिए किया जा रहा है।
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अकेले जल निगम की ओर से 15 से अधिक और बाकी जलसंस्थान की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। सिंचाई वाले ट्यूबवेलों का इस्तेमाल पेयजल के लिए करने से न तो लोगों को पर्याप्त पानी मिल पा रहा और न ही खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी। इसका कारण यह है कि खेती और पेयजल दोनों के लिए ट्यूबवेलों का इस्तेमाल होने से ट्यूबवेलों पर लोड बढ़ जाता है। गर्मियों में लोड बढ़ने से अक्सर ट्यूबवेलों की मोटर फुंक जाती है और ट्यूबवेलों में खराबी आ जाती है। मोटर बदलने और ट्यूबवेल में अन्य खराबी ठीक करने में लगभग तीन से चार दिन लग जाते हैं। इससे न तो लोगों को पानी मिल पाता है और न खेतों को पानी।
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आर्केडिया क्षेत्र में पांच ट्यूबवेल से पेयजल आपूर्ति
दून में अकेले आर्केडिया क्षेत्र में सात सिंचाई ट्यूबवेल पेयजल के लिए इस्तेेमाल हो रहे हैं। बनियावाला, पीतांबरपुर, श्यामपुर, ठाकुरपुर, बड़ोवाला स्थित सिंचाई के ट्यूबवेल पेयजल के साथ ही सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे यहां लोगों को न तो पर्याप्त पानी उपलब्ध हो पा रहा और न किसानों के खेतों के लिए पर्याप्त पानी। यह हाल तब है, जब जल निगम के इस क्षेत्र में 15 नए ट्यूबवेल तैयार हैं, लेकिन अभी तक उन्हें चालू नहीं किया गया है।
सिंचाई के ट्यूबवेल पेयजल के लिए इस्तेमाल होने से किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे किसान परेशान हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन से आग्रह किया गया कि सिंचाई के ट्यूबवेलों को इस्तेमाल पेयजल के लिए न किया जाए। पेयजल निगम और जलसंस्थान अपने ट्यूबवेलों का इस्तेमाल करें।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता
दून में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत है। लिहाजा लोगों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग से उनके ट्यूबवेलों का पेयजल के लिए इस्तेमाल करने का आग्रह किया जाता है। कोशिश की जाती है कि इससे खेती भी प्रभावित न हो और लोगों को पर्याप्त पानी भी उपलब्ध हो सके।
- निलिमा गर्ग, महाप्रबंधक, जलसंस्थान
जिन क्षेत्रों में पेयजल का संकट हैं, वहां जलसंस्थान के आग्रह पर सिंचाई के ट्यूबवेलों को पेयजल के इस्तेेमाल के लिए दिया जाता है। समस्या यह आती है कि ज्यादा इस्तेमाल से ट्यूबवेलों पर लोड बढ़ जाता है और मोटर फुंकने और ट्यूबवेल में तकनीकी खराबी आ जाती है। ठीक करने का जिम्मा सिंचाई विभाग का होता है, इसलिए दिक्कत आती है।
- वीएस पाल, एसई, सिंचाई विभाग