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रिस्पना नदी के पुनर्जीवीकरण को आगे आया राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान

Fri, 27 Dec 2019 01:36 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 01:36 AM IST
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National Institute of Hydrology has come forward to revive river Rispna
यमुना कालोनी स्थित सिंचाई भवन के सभागार में आयोजित वर्कशॉप में जानकारी प्राप्त करती सिंचाई सचिव
रिस्पना नदी के पुनर्जीवीकरण को लेकर सरकार के साथ ही राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकाें ने पहल की है। राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम ने नदी का विस्तृत अध्ययन किया है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने सिंचाई भवन में आयोजित वैज्ञानिक सेमिनार में अध्ययन रिपोर्ट से जुड़े तमाम पहलुओं पर जानकारियां आला अधिकारियों से साझा की।
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वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में बताया गया कि नदी के विभिन्न इलाकों में पार्कोलेशन डैम, चेक डैम, ट्रेंच, गैवियन स्ट्रक्चर का निर्माण कर नदी के जलस्तर को सुधारा जा सकता है। साथ ही इसे प्रदूषण मुक्त करने में भी मदद मिलेगी। सचिव सिंचाई डॉ. भूपिंदर कौर औलख की मौजूदगी में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरपी पांडे ने वैज्ञानिकों की टीम द्वारा किए गए शोध के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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डॉ. पांडे ने बताया कि नदी के बीचोबीच पार्कोलेशन डैम, मशीनरी स्टॉप डैम, गैवियन स्ट्रक्चर का निर्माण कर नदी के जल प्रवाह को रोककर भूमिगत जल को रिचार्ज किया जा सकता है। साथ ही इन सभी निर्माण कार्यों के साथ ही नदी को प्रदूषण से भी बचाया जा सकता है। सेमिनार के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने रिस्पना नदी के मानचित्रण, जल उपयोग, जल भूसंरचना मानचित्रण, जल गुणवत्ता, जैसे तमाम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। वैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह भी पाया है कि रिस्पना नदी के भूजल स्तर वर्ष 1995 से 2004 की तुलना में वर्ष 2006 से 2015 के बीच में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है जो गंभीर बात है।
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सेमिनार में संबोधित करते हुए डॉ. भूपिंदर कौर औलख ने कहा कि नदियों के संरक्षण व उनको मृत होने से बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। राइन व साबरमती जैसी नदियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब इन नदियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है, तो रिस्पना, बिंदाल जैसी नदियों को क्यों नहीं किया जा सकता।
प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष मुकेश मोहन ने कहा कि नदियों के किनारे सभ्यताएं विकसित हुई हैं। प्रमुख अभियंता मुकेश मोहन, मुख्य अभियंता पीसी गौड़, अभियंता जयपाल सिंह, बीके पांडे सुभाष चंद, डीएस कछवाहा, डीके सिंह के अलावा जल अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम में डॉ. आरपी पांडे, डॉ. जीबी त्यागी, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. सुमंत कुमार, एनके भटनागर, हुकुम सिंह, डॉ. आरपी सिंह, अंजू चौधरी, राकेश गोयल, वाईके शर्मा, नरेश कुमार, पंकज कुमार आदि उपस्थित थे।

वैज्ञानिकों ने दिया रूफ वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर
सेमिनार के दौरान वैज्ञानिकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि नदी के किनारे बनी आवासीय कालोनियों में रूफ टाप वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देकर नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके लिए तमाम सरकारी एजेंसियाें को मिलकर काम करना होगा।
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