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NGT की फटकार का नहीं दिखा खास असर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 07 Feb 2016 02:20 PM IST
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की फटकार के बाद भी गंगोत्री इको सेंसेटिव जोन को लेकर गठित निगरानी समिति संजीदा दिखाई नहीं दे रही है। सचिवालय में हुई बैठक में विभागों ने जोनल प्लान समिति के सामने रखे। अब दस फरवरी तक विभागों को जोनल प्लान को अंतिम रूप देने को कहा गया है।
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दूसरी तरफ, एनजीटी ने साफ कहा था कि छह फरवरी को होने वाली बैठक में जोनल प्लान को अंतिम रूप दे दिया जाए। प्रमुख सचिव रामास्वामी मामला कोर्ट में होने की दुहाई देकर कोई टिप्पणी करने तक को तैयार नहीं हुए। हद तो यह है कि अब भी यह साफ नही है कि जोनल प्लान को तैयार करने में प्रभावित लोगों से कितनी बात की गई। निगरानी समिति के एक सदस्य के मुताबिक इको सेंसेटिव जोन को लेकर विरोध ही इसलिए हो रहा है कि स्थानीय लोगों को पूरी जानकारी दी ही नहीं गई।
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गंगोत्री इको सेंसेटिव जोन पर 28 जनवरी, 2016 को हुई सुनवाई में एनजीटी ने साफ आदेश दिया था कि निगरानी समिति की बैठक छह फरवरी को होगी और इस बैठक में जोनल प्लान को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। एनजीटी ने इसके साथ ही प्रदेश सरकार को यह भी आदेश दिया था कि 2013 की आपदा के कारण प्रभावित हुई परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण का काम मानसून से पहले ही पूरा कर लिया जाए। एनजीटी ने इस मामले में सरकार से फरवरी, 2016 के अंतिम सप्ताह तक अनिवार्य रूप से पूरा जवाब मांगा है।
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केंद्र सरकार ने 12 दिसंबर, 2012 को गंगोत्री इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था। अधिसूचना में निगरानी समिति का गठन कर लोगों की राय लेकर जोनल प्लान तैयार करने को कहा गया था। हद यह हुई कि तीन साल बीत जाने के बाद भी जोनल प्लान तैयार नहीं हो पाया।
शनिवार को सचिवालय में हुई निगरानी समिति की बैठक में बहुत अधिक संजीदगी सामने नहीं आई। बताया गया कि विभागों ने जोनल प्लान तैयार कर लिया है। निगरानी समिति की विशेषज्ञ सदस्य ललिता भनोत ने बताया कि दस फरवरी तक विभागों को जोनल प्लान को अंतिम रूप देने को कहा गया है। ललिता भनोत यह भी स्वीकार कर रही हैं कि जोनल प्लान को बेवजह अभी तक लटकाया गया। जोनल प्लान दो साल पहले ही तैयार हो जाना चाहिए था।
एक्यूपेंचर पर बात कर लो, जोनल प्लान पर नहीं
प्रमुख सचिव वन एस रामास्वामी एक्यूपेंचर पर बात करने को तैयार हैं पर जोनल प्लान पर नहीं। पूछे जाने पर रामास्वामी यह कहकर किनारे होने की कोशिश करते नजर आए कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। दूसरी तरफ, एक्यूपेंचर का 25 साल का अनुभाव बताने में प्रमुख सचिव ने कोई गुरेज नहीं किया।