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नारी निकेतन शोषण मामला, पत्र में छिपा है सच

Tue, 01 Dec 2015 11:43 AM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 01 Dec 2015 11:43 AM IST
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nari niketan molestation case update.

फैक्स के जरिए मिला गोपनीय पत्र में बड़ा सच छिपा हो सकता है। अमूमन पुलिस और प्रशासन इस तरह के पत्रों की अनदेखी कर समुचित जांच कराने की जहमत नहीं उठाते। आपको बता दें कि एक गोपनीय फैक्स से ही नारी निकेतन में दुराचार और गर्भपात मामले का पर्दाफाश हो पाया है।

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गौरतलब है कि फैक्स की जो प्रति अमर उजाला को मिली उसमें उस पत्र को सचिव समाज कल्याण और मुख्यमंत्री सहित कुछ अन्य अधिकारियों को भेजने का उल्लेख किया गया था। अमर उजाला ने पत्र की महत्ता और संवेदनशीलता को समझकर संवासिनियों को इंसाफ दिलाने का बीडा उठाया।
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ईमानदारी से जांच हुई तो सच सामने आ गया। उस समय किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह बेनामी पत्र नारी निकेतन के दरिंदों के चेहरे को बेनकाब करने का कारण बनेगा। बरसों पुरानी गोपनीय पत्र की परंपरा अफसरों की इच्छाशक्ति की कमी की वजह से अब दम तोड़ गई है।
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हर बड़े स्कैंडल और जुर्म का खुलासा इस तरह के पत्रों से होता रहा था। सरकारी महकमों में बाकायदा गोपनीय पत्रों के लिए एक बाक्स भी लगाया जाता था, ताकि कोई भी अपना नाम छिपाकर गोपनीय जानकारी दे सके। दूरसंचार क्रांति के बाद इस तरह के पत्रों की महत्ता कम हुई और अधिकारियों ने उसकी अनदेखी शुरू कर दी। अनदेखी की बड़ी वजह यह भी रही कि कुछ लोगों ने व्यक्तिगत रंजिश के लिए ऐसे पत्रों का दुरुपयोग भी शुरू कर दिया।

नारी निकेतन में संवासिनी का शारीरिक शोषण और गर्भपात के खुलासे के पीछे गोपनीय फैक्स ही है। फैक्स भेजने वाले ने इसे कई मीडिया हाउस को भी भेजा था, लेकिन अमर उजाला ने पत्र की संवेदनशीलता को समझा। हालांकि उस समय साक्ष्य के तौर पर केवल फैक्स ही था। कुछ कहना मुश्किल था कि पत्र में लिखे गए शब्द सच हैं या झूठ।

लेकिन अमर उजाला टीम ने पहल करते हुए फैक्स की सचाई जानने की ठानी। पड़ताल की तो एक-एक कर चौंकाने वाले तथ्य उजागर होते चले गए। इन तथ्यों को सामने रखकर प्रशासन से जांच का अनुरोध किया। इस बीच प्रकरण में कई उतार-चढ़ाव आए। कुछ लोगों ने क्लीन चिट के साथ आलोचनाएं भी की।

नारी निकेतन तंत्र ने साक्ष्यों को मिटाने के साथ हर तरफ झूठ का ताना-बाना बुना, लेकिन कहते हैं ना कि सच छिपाए नहीं छिपता। संवासिनी का शारीरिक शोषण करने और बाद में साक्ष्य मिटाकर जुर्म छिपाने का प्रयास करने वालों पर कानूनी शिकंजा कस ही गया है।

मूक बघिर संवासनियों की चीख नहीं सुनी सत्ताधारी दल ने

उत्तराखंड को शर्मिंदा करने वाले नारी निकेतन यौन शोषण के मामले में भद्र समाज को राजनीतिक संवेदनहीनता से भी रूबरू होना पड़ा। शुरूआती दौर में सत्ताधारी दल कांग्रेस की पेशानी पर रत्ती भर बल नहीं पड़े। विपक्ष ने दो दिन बाद आंदोलन शुरू किया, वर्ना प्रदेश में अन्य सभी राजनीतिक दलों में इस मुद्दे पर संवेदनाओं की शून्यता बरकरार रही।

विगत सत्रह नवम्बर को जब अमर उजाला ने नारी निकेतन में संवासनियों के साथ दुराचार की घटना का खुलासा किया तो महिला सशक्तिकरण की पैरोकार बनने वाली कांग्रेस सरकार को जैसे सांप सूंघ गया। अगले ही दिन सरकार की तरफ से इस घटना को खारिज कर दिया गया।

राज्य सरकार निष्ठुर हो गई और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पार्टी विधायक व प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य को जांच के लिए निकेतन भेज दिया। सरिता आर्य ने भी संवासनियों की दुर्गति से मुंह फेर सरकार को क्लीन चिट दे दी। इसी घटना ने मुख्यमंत्री को हिलाने का काम किया। सरिता आर्य की इस जांच को खासतौर पर महिला वर्ग में निंदनीय करार दिया गया।

इसी बीच भाजपा ने आंदोलन शुरू कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक भाजपाई सरकार पर पिल पड़े। भाजपा ने भी पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधायक विजय बड़थ्वाल के नेतृत्व में एक टीम गठित कर नारी निकेतन भेज कर जांच कराई।

इस जांच रिपोर्ट को मंगलवार को राज्यपाल को सौंपा जाएगा। भाजपा के अलावा यह घटना सपा, बसपा, उक्रांद किसी भी दल को झकझोरने में जैसे नाकाम रही, लेकिन सरकार और सत्तारूढ़ दल, दोनों ने ही इस मुद्दे पर राजनीतिक तौर पर बढ़त लेने भर की ही कोशिश की। कुछ दिन बीते जब वीडियो आदि जारी कर दिया गया तब कहीं जाकर सरकार जागी और कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ा।

अब साक्ष्य मिटाने वालों की बारी

नारी निकेतन मामले में साक्ष्य को मिटाने की कोशिश करने वाले भी पुलिस के रडार पर हैं। एक महिला अधिकारी, नर्स और संवासिनी को अस्पताल लाने और ले जाने वाली महिला कर्मियों पर कानूनी फंदा कस सकता है। पुलिस ने इस दिशा में कार्रवाई बढ़ा दी है।

संवासिनी से यौन शोषण के आरोपियों से नारी निकेतन की कार्यवाह प्रभारी समेत अन्य महिला कर्मियों का भी जुर्म कम नहीं है। संवासिनियों के सम्मान और उनकी सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली नारी निकेतन की महिला कर्मचारियों ने आरोपियों को पकड़वाने के बजाए उनके कुकृत्य पर पर्दा डालने में जुटी रही।


साक्ष्य मिटाने के लिए पुलिस इन महिला कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में है। वहीं, एसएसपी का कहना है कि अब तक की जांच पड़ताल में संवासिनी से रेप की घटना नारी निकेतन के अंदर होने की पुष्टि हुई है।

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