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इस राह से कैसे आएंगी मां नंदा

Tue, 06 Aug 2013 01:15 PM IST
जयवीर मनराल
जयवीर मनराल Updated Tue, 06 Aug 2013 01:15 PM IST
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nanda raj jat yatra facing problem

मां नंदा के मायके के आखिरी पड़ाव भगोती की राह भी मुश्किलों से भरी है। कोटी से लेकर भगोती तक जाने वाले सात किमी पैदल रास्ते का आज तक निर्माण नहीं हुआ है।

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यह पूरा मार्ग वन क्षेत्र में होने के साथ ही चट्टानी भी है लेकिन तैयारियों के नाम पर इसकी सुध तक नहीं ली गई। भले ही भगोती में कुछ काम पूरे हुए हैं लेकिन यहां भी पेयजल लाइन मरम्मत के दौर से गुजर रही है।
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मां नंदा (भगवती) के नाम पर गांव का नाम ‘भगोती’ पड़ा। समुद्रतल से करीब 1320 मीटर की ऊंचाई बसा यह गांव पिंडरघाटी के नारायणबगड़ बाजार से करीब आठ किमी की दूरी पर स्थित है। यह श्रीगुरु पट्टी का मध्य स्थल भी माना जाता है।
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आपदा के बाद से यह क्षेत्र सड़क संपर्क से पूरी तरह से कटा हुआ है। पिंडरघाटी की लाइफ लाइन कर्णप्रयाग-ग्वालदम सहित दर्जनभर से अधिक संपर्क मार्ग अब तक बहाल नहीं हो पाए हैं। पैदल रास्तों की दूरी भी बढ़ गई है। ऐसे में मां नंदा के इस आयोजन में भक्त कैसे यहां पहुंचेंगे, यह भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

भगोती पड़ाव पर हुए काम
फरगलिया और छाया चौरी छैकुड़ा में प्रतीक्षालय निर्माण हो चुका है। भगोती में पेयजल लाइन बीते दो माह पूर्व बन गई थी लेकिन आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई, इसकी मरम्मत की जा रही है। केवर गदेरे में एक भी काम पूरा नहीं हुआ है।

हैरत की बात है कि राजजात में जिस केलीबागान में भीड़ उमड़ती है, वहां पर समतलीकरण कार्य विकास विभाग की भेंट चढ़ गया है। केवर गदेरा में पुलिया क्षतिग्रस्त हो चुकी है। यहां पर वैलीब्रिज की घोषणा भी अभी तक फलीभूत नहीं हो पाई है।

भगोती में मां नंदा का प्रचीन मंदिर
भगोती में मां नंदा का प्राचीन मंदिर है। यह भी अन्य प्राचीन मंदिरों की भांति है। यहां पर मां नंदा की प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जाती है। राजजात में भगोती गांव के ऊपर छाया चौरणी (छैकुड़ा) में क्षेत्र के कंडवाल गांव से मां नंदा की छंतोली शामिल होती है। भगोती में सिलोड़ी गांव की छंतोली मिलती है। केवर गांव में भी आराध्य की विशेष पूजा होती है।

...जब कई बार मायके की तरफ मुड़ती मां नंदा
पांचवें पड़ाव कोटी मां नंदा की डोली रात्रि विश्राम के लिए भगोती पहुंचती है। यहां से दूसरे दिन केवर के रास्ते मां की छंतोली कुलसारी के लिए प्रस्थान करती है। यहां पर ध्याण को विदा करने के लिए मायके पक्ष के समस्त गांवों के भक्त पहुंचते हैं। केली बागान में देवी की छंतोली कई बार मायके की तरफ मुड़ती है। यहां पर भावुकता और भक्ति का अद्भुत मिलन होता है।

कोटी से भगोती का पैदल मार्ग अभी तक नहीं बन पाया है। इस बदहाल रास्ते से राजजात कैसे यहां पहुंचेगी, चिंता बनी है। सड़कें और अन्य पैदल मार्ग भी अभी तक अवरुद्ध चल रहे हैं। पड़ाव पर कुछ काम हो चुके हैं। पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी, उसकी मरम्मत की जा रही है।

- रेखा नेगी, ग्राम प्रधान भगोती

आपदा के बाद से हालात बदल गए हैं। सरकारी तैयारियां शून्य हैं। सड़कें, पैदल रास्ते चारों तरफ से बंद हैं। लेकिन परंपरा को तो निभाना ही होगा। गांव ने अपने स्तर से तैयारियां की हैं। हम राजजात के स्वागत के साथ ही उसके सफल संचालन के लिए तैयार हैं।
- जगदेश्वर सिंह नेगी, राजजात पड़ाव अध्यक्ष भगोती

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