फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   nanda raj jat yatra facing problem

मां नंदा के ससुराल जाने की डगर कठिन

Wed, 31 Jul 2013 08:26 AM IST
प्रमोद सेमवाल
प्रमोद सेमवाल Updated Wed, 31 Jul 2013 08:26 AM IST
विज्ञापन
nanda raj jat yatra facing problem

स्थानीय लोगों के लिए मां नंदा की मायके से ससुराल में विदाई की बेला बड़ी पीड़ादायक होती है। फूट-फूटकर रोते लोग कलेजे पर पत्थर रखकर बेटी की विदाई करते हैं। मानसिक पीड़ा के संग-संग इस बार आपदा के चलते विदाई की डगर भी बेहद कठिन हो चली है।

विज्ञापन


देखें, उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
विज्ञापन


राज्य सरकार पहले ही यात्रा के आयोजन से पल्ला झाड़ चुकी है। ऐसे में श्रीनंदा राजजात आयोजन समिति के अलावा स्थानीय ग्रामीणों के सामने भी यात्रा का सफल और सुरक्षित आयोजन बड़ी चुनौती बन गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हर 12वें वर्ष आयोजित होने वाली श्रीनंदा राजजात के शुरू होने में लगभग एक माह का समय ही शेष है। यात्रा के वापसी मार्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। यहां घाट विकास खंड से होकर गुजरने वाले यात्रा मार्ग के झूरागाड, भेंटी, बंगाली, जांखणी, कनोल, सरपाणी, लांखी और सितेल में बने पैदल पुल बह जाने से स्थानीय लोगों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है।

आपदा से भारी नुकसान
साथ ही यात्रा मार्ग में पड़ने वाले पड़ावों कुरुड़, उस्तोली, भेंटी, बंगाली, बूंगा और बरछोल गांवों में भी आपदा से भारी नुकसान हुआ है। यहां ग्रामीणों के आवासीय भवन क्ष्ाितग्रस्त होने के चलते ग्रामीण टेंटों में शरण लिए हुए हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान आने वाले तीर्थयात्रियों के रहने और खाने व्यवस्था कैसे सुचारु हो पाएगी। यह राजजात समिति के सम्मुख बड़ी चुनौती है।

वहीं, स्थानीय निवासी गौर सिंह नेगी, रणजीत सिंह, हीरा सिंह, और मोहन सिंह का कहना है कि यात्रा को लेकर किए गए सभी निर्माण कार्य क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मार्ग डेढ़ माह से बंद हैं, जिससे रोजमर्रा की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे राजजात जैसे महा आयोजन के सफल संचालन को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं।


ये डोलियां गुजरती हैं घाट प्रखंड से:-
दशोली, ल्वांणी, लाता, दशम द्वारा, कुरुड़, बदरीनाथ से आया निशान

श्री नंदा देवी राजजात के आबादी वाले पड़ावों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है पुलिस की है। निर्जन पड़ावों पर भी शासन और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे।
- अजय जोशी, पुलिस अधीक्षक, चमोली

मां नंदा की वार्षिक जात प्रत्येक वर्ष वेदनी कुंड तक आयोजित की जाती है। इस बार भी आयोजित की जाएगी। होमकुंड तक की यात्रा की जिम्मेदारी राजजात यात्रा समिति और प्रशासन की है। समिति और प्रशासन के अनुसार वेदनी से आगे के आयोजन में भाग लिया जायेगा।
- मंशाराम गौड़, सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर समिति

खबर पर राय देने के लिए क्लिक करें

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed