Namami Gange: गंगा को निर्मल बनाने में जुटे विजेंद्र प्रताप, कहा- गंगा हमारा भविष्य, साफ रखने में हो सहभागिता
विजेंद्र प्रताप ने कहा कि नमामि गंगे परियोजना भारत द्वारा चलाई जा रही है और इसके द्वारा जो कार्य हुए हैं, वह इस बात पर केंद्रित हैं कि गंगा और इस पर निर्भर लोगों का जीवन कैसे सुखमय हो। मैं भारत सरकार के इस सरानीय कार्य में प्रयास करने के लिए खुद को आभारी मानता हूं।
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जीवनदायिनी गंगा पापों का नाश कर मोक्ष प्रदान करती है। ऐसी पावन धारा को निर्मल बनाए रखने के लिए हर जतन किए जाने चाहिए। इसी ध्येय के साथ उत्तराखंड के कांगड़ी में पथ न्यास के फाउंडर विजेंद्र प्रताप पांडेय गंगा को बचाने में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की परियोजना 'नमामि गंगे' गंगा को स्वच्छ और पवित्र करने के लिए चल रही है। गंगा की धरोहर को बचाने के लिए चल रही है, इस कार्य से मैं भी जुड़ा हूं। हरिद्वार का ग्रामीण क्षेत्र जो कांगड़ी क्षेत्र है, जो गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से जुड़ा है। यह गंगा के किनारे का गांव है। यहां के लोग बहुत ही कम पढ़े-लिखे हुए हैं, जिस कारण गंगा की पवित्रता और महत्ता के प्रति लोग बहुत ज्यादा जागरूक नहीं है।
विजेंद्र पांडेय ने कहा कि गत चार वर्षों से मैं प्रयास करके गंगा और गंगा के महत्व को लेकर लोगों को जागरूक कर रहा हूं। समय-समय पर गंगा की साफ-सफाई और गंगा के प्रति लोगों में जागरूकता फैला रहा हूं। गंगा ही हमारा भविष्य है। गंगा में किसी प्रकार की गंदगी न फेंकें। गंगा से ही हमारा भविष्य सुरक्षित रह सकता है, यह संदेश लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा हूं। इसके लिए लोगों से मिलकर जगह-जगह गोष्ठी की जाती हैं और उनसे बात करने का प्रयास करता हूं। खासकर जो गांव की महिलाएं हैं और छोटे बच्चे हैं, जिनके द्वारा गंगा को साफ करने में बहुंत मदद मिलती है। इनकी मदद से समूह बनाकर जगह-जगह पर स्वच्छता अभियान चलाता हूं।
नमामि गंगे परियोजना भारत द्वारा चलाई जा रही है और इस विभाग के द्वारा जो कार्य हुए हैं, वह इस बात पर केंद्रित हैं कि गंगा और इस पर निर्भर आबादी का जीवन कैसे सुखमय हो। मैं भारत सरकार के इस सराहनीय कार्य के लिए खुद को आभारी मानता हूं। इसमें अपनी जो भी सहभागिता हो सकेगी, वह करने का प्रयास करता हूं। मैं यहीं गंगा के किनारे रहता हूं। आप सभी भी गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे परियोजना से जुड़े और गंगा को पवित्र बनाएं। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बहुत ही अच्छा प्रयास है। इसमें हमारी भी भूमिका हो और सभी की सहभागिता हो ऐसा प्रयास करें।