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आने वाले हफ्तों में सूख जाएंगी नैनीताल की नैनी और चंडीगढ़ की सुखना झील, जानिए इसके पीछे की वजह

Sun, 28 May 2017 01:19 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 28 May 2017 01:19 PM IST
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nainital lake and sukhna lake is drying
नैनी झील - फोटो : अमर उजाला

भारत में पानी के कई प्राकृतिक स्रोत हैं, लेकिन मानवीय हस्तक्षेप के कारण ये स्रोत विलुप्त होते जा रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देशी-विदेशी पर्यटकों को लुभाने वाली नैनी और सुखना झील आने वाले हफ्तों में सूख जाएंगी। ऐसा ही देश की अन्य झीलों के साथ भी होगा।



सेंटर्स ड्राफ्ट स्टेट ऑफ द एनवायरमेंट रिपोर्ट 2015 के मुताबिक अब भारत अपने जल को इसी तरह रखता है तो 2050 तक भारतीय अर्थव्यवस्‍था में जल संसाधन में 6 प्रतिशत की कमी देखी गई है।

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Sukhna Lake

एक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की प्रोग्राम मैनेजर (वॉटर) सुष्मिता सेनगुप्ता ने बताया कि आखिर क्यों भारत की झीलें सूख रही हैं। सुष्मिता सेन गुप्‍ता के मुताबिक नैनीताल और सुखना झील (चंडीगढ़) के सूखने के पीछे उन विभागों की उदासीनता है, जिन्हें इन झीलों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
 

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nainital
इन इलाकों में बारिश कम होने से भी झील सूख रही हैं। नैनीताल झील में संबंध में बढ़ता प्रदूषण, विकास, भारी संख्या में पर्यटकों का आवागमन, जलीय क्षेत्रों में जंगलों का कटना, ढलानें पर भवनों का अंधाधुंध निर्माण, समय-समय पर होने वाला भूस्‍खलन और सीवरेज का प्रत्यक्ष प्रवाह झील और इसकी पारिस्थितिकी को तबाह कर रहे हैं। सुखना झील के संबंध में जलग्रहण क्षेत्र में अनियोजित शहरीकरण का होने वाली विशाल गाद (मलबा) नुकसान पहुंचा रही है।

 
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रोज 10 से 15 एमएम तक सूख रही सुखना
सेनगुप्ता ने बताया कि इन झीलों को बचाने के लिए दिसंबर 2‌‌010 में मिनिस्ट्री ऑफ एनवायमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लामेट चेंज ने वेटलैंड मैनेजमेंट को एक प्राधिकरण के तहत लाने के लिए एक्सक्लूसिव नियम पब्लिश किए थे। इससे पहले देश की आद्रभूमि को इंडियन वाइल्ड लाइफ (प्रोटेक्‍शन एक्ट) 1972, द इंडियन फिशरीज एक्ट 1897 और द इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 बनाए गए थे।

 
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सुखना लेक - फोटो : अमर उजाला

नया नियम वेटलैंड रूल्स 2010 कहा जाता है। लेकिन इस सबसे दूर, किसी भी राज्य ने न तो इससे संबंधित डाटा कंपाइल किया है और न ही कोई एजेंसी संगठित की। झीलों को बचाने के लिए जुलाई 2016 में सेंट्रल वेटलैंड रेगुलेटरी ऑथोरेटी, दिसंबर 2016 में वेटलैंड अमेंडमेंट रूल्स आदि प्रावधान रखे गए हैं। वर्तमान में झीलों की देखरेख पब्लिक हैल्‍थ इंजीनियरिंग, वॉटर सप्लाई, फिशरीज, इरिगेशन, अरबन डेवलपमेंट, टूरिज्म एंड फॉरेस्ट, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट और वन व पर्यावरण विभाग के अंतर्गत आती हैं।
 

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