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उत्तराखंड : आईएफएस संजीव चतुर्वेदी से जुडे मामले में भारत सरकार ने कहा - एफआरआई मान्यता प्राप्त नहीं

Fri, 30 Apr 2021 12:16 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 30 Apr 2021 12:16 PM IST
सार

दाखिल जवाब में कहा गया है कि याचिकाकर्ता संजीव चतुर्वेदी की परास्नातक डिग्री किसी मान्यता प्राप्त विवि या संस्थान से जारी नहीं है।

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nainital high court news : central government says FRI dehradun is not affiliated institute or university
वन अनुसंधान संस्थान देहरादून - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट में चर्चित आईएफएस संजीव चतुर्वेदी से जुडे़ एक मामले में भारत सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर कहा गया है कि वन अनुसंधान संस्थान देहरादून मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय नहीं है। 

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इस प्रकरण में विवाद के प्रमुख बिंदुओं में से एक यह है कि कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के सदस्य पद के लिए निर्धारित योग्यता में से एक योग्यता यह थी कि संबंधित अधिकारी के पास परास्नातक डिग्री होनी चाहिए। 28 अप्रैल को दाखिल जवाब में कहा गया है कि याचिकाकर्ता संजीव चतुर्वेदी की परास्नातक डिग्री किसी मान्यता प्राप्त विवि या संस्थान से जारी नहीं है।
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बता दें कि भारत सरकार ने एसएससी पद के लिए आईएफएस संजीव चतुर्वेदी का आवेदन खारिज कर दिया था। जिसे संजीव चतुर्वेदी ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा था कि उनकी जन्मतिथि 21 दिसंबर 1974 है, जबकि कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय व केंद्र के चयन किए अभिलेखों में 13 जुलाई 1962 या 57 साल सात माह दर्शाई है।

आवेदन की अंतिम तिथि 23 मार्च 2020 थी। जिसके लिए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें 19 मार्च 2020 को अनापत्ति व सहमति पत्र जारी कर भारत सरकार को भेज दिया था। पोस्ट आफिस की ट्रेकिंग रिपोर्ट के अनुसार यह पत्र 20 मार्च को तीन बजकर 31 मिनट पर डीओपीटी को प्राप्त हो गया। डीओपीटी के चयन दस्तावेजो में पत्र प्राप्ति 29 मई दिखाई है।

आईएफएस संजीव चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को किया था अलग

भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव पद पर सीधी भर्ती के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के न्यायाधीश आरएन सिंह ने भी खुद को अलग कर लिया था। संजीव की ओर से अब मामले की सुनवाई नैनीताल बैंच में करने और केंद्र सरकार पर जुर्माना लगाने की मांग की गई थी।

हल्द्वानी में वन अनुसंधान केंद्र में मुख्य वन संरक्षक के रूप में तैनात संजीव चतुर्वेदी ने कुछ समय पहले केंद्र सरकार में संयुक्त सचिवों के पदों पर सीधी भर्ती के खिलाफ कैट की नैनीताल बैंच में याचिका दायर की थी। इस मामले को बाद में कैट दिल्ली हस्तांतरित कर दिया गया था।

इसी मामले की सुनवाई न्यायाधीश आरएन सिंह कर रहे थे। यह पहला मामला नहीं है जब किसी न्यायाधीश ने चतुर्वेदी के मामले में सुनवाई से खुद को अलग किया हो। कैट चेयरमैन एल नरसिम्हन रेड्डी ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया था। 

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