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चुनाव आयोग की साख को बट्टा लगाने की इजाजत नहीं: हाइकोर्ट

Sat, 03 Jun 2017 12:15 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Sat, 03 Jun 2017 12:15 PM IST
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nainital high court favour of Central election commission for EVM matter
nainital high court

केंद्रीय चुनाव आयोग को उत्तराखंड हाइकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ईवीएम में छेड़छाड़ साबित करने की राजनीतिक दलों को उसकी चुनौती को हरी झंडी देने के साथ ही हाल में हुए विधानसभा चुनावों को निष्पक्षता से कराने के लिए उच्च न्यायालय ने आयोग की सराहना की है।

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इसी के साथ कोर्ट ने ईवीएम में छेड़छाड़ संबंधी परिणाम आने तक किसी भी माध्यम से ईवीएम की आलोचना किए जाने पर रोक लगा दी है। अदालत ने ईवीएम में छेड़छाड़ के मामले में केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसके आदेशों पर कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों को किसी भी संवैधानिक संस्था की साख को धक्का पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। 

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ईवीएम मामले को लेकर कोर्ट का रुख कड़ा

nainital high court favour of Central election commission for EVM matter
nainital high court

मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद शर्मा के समक्ष हुई। कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए और व्यापक जनहित के मद्देनजर सभी हाल में हुए विस चुनावों के संदर्भ में राज्यों के राजनीतिक दलों, अन्य राजनीतिक दलों, एनजीओ या व्यक्तिगत रूप से ईवीएम के प्रयोग की आलोचना पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने कहा है कि इस संबंध में चुनाव आयोग का फैसला आ जाने तक कोई भी व्यक्ति इलेक्ट्रानिक माध्यम, प्रेस, रेडियो, फेसबुक, ट्विटर इत्यादि के जरिये ईवीएम की आलोचना नहीं कर सकता है। 

नैनीताल निवासी डा. रमेश पांडे ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि चुनाव आयोग केवल चुनाव करा सकता है। चुनाव के बाद यदि कोई गलती मिलती है तो उस पर कोर्ट कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा था कि वर्ष 2017 में उत्तराखंड समेत चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ की गई थी।

इस तरह के आरोप अनेक राजनीतिक दलों ने लगाए हैं। इस पर केंद्रीय चुनाव आयोग ने 20 मई 2017 को एक विज्ञप्ति जारी कर सभी राजनीतिक दलों को 03 जून को चुनाव आयोग के समक्ष ईवीएम में छेड़छाड़ को साबित करने की चुनौती दी थी। याचिका में चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए ईवीएम मशीनों के प्रदर्शन करने को चुनाव आयोग के विवेक पर छोड़ने का निर्देश दिया। 

क्या कहा कोर्ट ने

nainital high court favour of Central election commission for EVM matter
Demo Pic

कोर्ट ने केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से चुनाव कराने की सराहना भी की है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने सफलता पूर्वक फ्री एंड फेयर चुनाव कराए हैं। हम राजनीतिक दलों को किसी संवैधानिक संस्था की साख व प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाने की इजाजत नहीं दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की आलोचना गैर वाजिब है। आमजन का विश्वास इस संस्था पर बना रहना जरूरी है।

चुनाव आयोग की किसी अन्य संस्था से तुलना नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कोर्ट का यह भी दायित्व है कि वह संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को बरकरार रखे तथा उनकी गैर वाजिब आलोचना पर अंकुश लगाए। यदि समाज की कुछ संस्थाएं इस तरह की संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाएंगी तो ऐसे में लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर पड़ जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह अर्थ नहीं है कि संवैधानिक संस्था के खिलाफ मनमाने आरोप लगाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि ईवीएम मशीनों का निर्माण इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन आफ इंडिया करती है तथा इसमें लगने वाली चिप भारत में ही बनाई जाती है। कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग के तीन जून से ईवीएम को चुनौती देने संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृति देते हैं लेकिन इससे कोर्ट में चुनाव संबंधी लंबित याचिकाओं पर कोई असर नहीं माना जाएगा।

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