इस जानवर के शिकार के लिए शिकारी जला रहे पूरा जंगल
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कस्तूरी मृग, स्नो लैपर्ड का शिकार करने के लिए शिकारी (पोचर्स) जंगलों में आग लगा दे रहे हैं।
जंगलों में नीचे की तरफ आग लगाने से वन्य जीव भागकर ऊपर की तरफ जाते हैं, जहां उनका शिकार कर लिया जाता है। ऊंचाई के जंगलों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। वन्यजीव तस्कर नेपाल की तरफ से प्रदेश में आते हैं।
पलायन के कारण खाली गांव इन पोचर्स के अड्डे बन रहे हैं। वन्य जीवों की पोचिंग के मामले में नेशनल वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो (एनडब्ल्यूएलसीबी) ने नेपाल और प्रदेश के अफसरों की संयुक्त बैठक बुलाई है।
हिमालयी क्षेत्र के जंगलों में पोचर्स ने अपना जाल बिछा रखा है। उनके द्वारा शेड्यूल-1 के कस्तूरी मृग, स्नो लेपर्ड, स्नो बियर आदि वन्य जीवों की पोचिंग की जा रही है। जंगलों में सुरक्षा के इंतजाम कम होने के साथ ही खाली पड़े गांव अवैध शिकारियों के लिए और आसानी पैदा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश किए जारी
उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड की शनिवार को हुई बैठक में इन बिंदुओं पर भी चर्चा हुई। बैठक में वन्य जीवों के अवैध शिकार का प्रकरण छाया रहा। सदस्यों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठाई तो बोर्ड अध्यक्ष मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस संबंध में जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए।
पोचर्स के शिकार करने के तरीके भी बैठक में बताए गए। कहा गया कि जंगलों में आग लगाकर वन्य जीवों को बाहर निकाला जाता है। चीन और नेपाल की तरफ से प्रदेश में पोचर्स आ रहे हैं। खाली, सुनसान गांव इनके अड्डे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पता किया जाना चाहिए कि खाली पड़े गांवों में कौन रह रहा है?
वन्य जीवों के अवैध शिकार को रोकने के संबंध में नेशनल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने प्रदेश और नेपाल के अफसरों के साथ भी बैठक बुलाई है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) दिग्विजय सिंह खाती ने बताया कि यह बैठक आगामी 23 फरवरी को होगी।
ईडी भी कर रहा है प्रोफाइलिंग
प्रदेश में वन्य जीव तस्करों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी तलाश में है। वन्य जीव तस्करी की जानकारी के लिए ईडी वन विभाग और अन्य विभागों से जानकारी जुटा रहा है। इसके साथ ही पिछले सालों में वन्य जीव तस्करी के संबंध में हुई एफआईआर का भी ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है।