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अब दून की दीवारें सुनाएंगी अनोखी कहानियां
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 05 Oct 2015 01:16 PM IST
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भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की पहली बार अंतरिक्ष में उतरने की खुशी और मंगलयान मिशन के पूरा होने पर गर्व का अहसास जल्द ही आपको दून में होगा।
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यही नहीं हरिद्वार में आयोजित कुंभ और दुनिया की सबसे लंबी पैदल व कठिन धार्मिक यात्रा नंदा देवी राज जात के अभूतपूर्व गौरव के साक्षी भी आप दून की सड़कों पर घूमते हुए हो सकेंगे। इन महत्वपूर्ण पलों और उपलब्धियों को एमडीडीए जल्द ही शहर की तमाम बड़ी दीवारों पर म्यूरल (भित्ति चित्र) के जरिये प्रदर्शित करेगा।
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एमडीडीए ने इसके लिए प्रसिद्ध दून स्कूल से संपर्क किया है। योजना के लिए दून स्कूल के आर्ट विभाग के विभागाध्यक्ष आलोक भौमिक को बतौर कंसलटेंट नियुक्त किया गया है। एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम खुद इस मामले में रुचि दिखा रहे हैं।
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इसके लिए कंसलटेंट के साथ मिलकर उन्होंने आठ अलग-अलग फर्मों और म्यूरल कलाकारों को सूचीबद्ध भी किया है। एमडीडीए सचिव पीसी दुम्का, उद्यान अधिकारी एआर जोशी समेत अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में हुए प्रजेंटेशन के बाद दो को फाइनल किया गया है। योजना के तहत पहले चरण में दिलाराम चौक स्थित जल संस्थान की दीवार पर म्यूरल बनाये जायेंगे।
पूर्व में आराघर चौक समेत कुछ स्थानों पर म्यूरल बनाये गये हैं लेकिन धीरे-धीरे यह खराब हो गये हैं। वहीं छोटे होने के कारण यह कई बार दूर से नजर भी नहीं आते।
अब बनने वाले म्यूरल बड़े और स्पष्ट होंगे जो दूर से भी आसानी से नजर आयेंगे। एमडीडीए ने इस संबंध में दून स्कूल के प्रिंसिपल को पत्र लिखकर चकराता रोड की तरफ वाली दीवार भी म्यूरल तैयार करने के लिए मांगी है। इसके अलावा कई अन्य दीवारों को भी चिन्हित किया जा रहा है।
मोजाइल टाईल्स का होगा प्रयोग
पहली बार राजधानी में म्यूरल निर्माण के लिए मोजाइल टाईल्स का प्रयोग किया जायेगा। आमतौर पर म्यूरल का निर्माण प्लास्टर ऑफ पेरिस से किया जाता है। बारिश, धूप और पाला जैसे मौसम के कारकों से यह बहुत जल्द खराब हो जाता है। जबकि मोजाइल टाईल्स से बनने वाला म्यूरल वर्षों तक खराब नहीं होता। इनका रंग भी जल्दी खराब नहीं होता और फटता भी नहीं है।
हर शहर की अपनी एक विशेषता और पहचान होती है। हर साल हजारों पर्यटक दून घूमने आते हैं। ऐसे में राज्य की संस्कृति और उपलब्धियों को उन तक पहुंचाने के साथ ही शहर की सुंदरता बढ़ाने में भी यह योजना कारगर सिद्ध होगी। इससे दून को आर्ट सिटी के रुप में पहचान मिलेगी।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, उपाध्यक्ष, एमडीडीए