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बदहाल शिक्षा व्यवस्था को देख मुंबई के पर्यटक ने दिखाया बड़ा दिल, ऐसे जगा रहे शिक्षा की अलख

Thu, 25 Jul 2019 10:08 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरी (उत्तरकाशी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोरी (उत्तरकाशी) Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 25 Jul 2019 10:08 AM IST
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Mumbai Tourist Give free education to students on his own expenses in uttarkashi 
स्कूल में पढ़ते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हरकीदून घाटी के अंतिम गांव ओसला में शिक्षकों के अभाव में बदहाल हुई शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मुंबई के पर्यटक सुंदर एन ने अनूठी मुहिम शुरू की है।

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उन्होंने गांव के ही दो शिक्षित युवकों को अपनी ओर से मानदेय देकर बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा सौंपा है। साथ ही उन्होंने बच्चों को पठन सामग्री और घर पर रोशनी के लिए सोलर लालटेन भी मुहैया कराए हैं।
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हरकीदून की सैर के लिए मुंबई से आए सुंदर एन कुछ साल पहले जब हरकीदून की ट्रैकिंग के लिए यहां पहुंचे तो इस सुदूरवर्ती गांव में शिक्षा व्यवस्था को बदहाल देख हैरान रह गए।

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बरातघर की मरम्मत और रंगरोगन कराकर बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था

इसके लिए सरकारी तंत्र को कोसने के बजाय उन्होंने गांव के ही दो शिक्षित युवकों मोती लाल और रणदेव सिंह को बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार किया। दोनों युवक बीएड प्रशिक्षित बेरोजगार हैं। युवकों को सुंदर अपनी जेब से प्रतिमाह 5-5 हजार मानदेय देते हैं।

गांव के बरातघर की मरम्मत और रंगरोगन कराकर यहां बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था की। अब इस व्यवस्था में गांव के प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं के अस्सी बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों से कोई फीस नहीं ली जाती, बल्कि उन्हें कॉपी-किताब आदि पठन सामग्री सुंदर ही मुहैया कराते हैं।

उन्होंने बच्चों को जल्द ही यहां पोर्टेबल टेबल मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है। बिजली से अछूते इस गांव में बच्चों को घर पर पढ़ाई में परेशानी न हो इसके लिए उन्होंने गांव के 80 परिवारों को सोलर लालटेन भी प्रदान की है।

चिकित्सक सेवाएं बदहाल

ओसला गांव के मूर्ति सिंह, इरवीर राणा, राजेंद्र, वरदान सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि गांव के जूनियर हाईस्कूल में कोई शिक्षक नहीं है। ऐसे में ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई के लिए नैटवाड़, मोरी, पुरोला की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। इस बीच पर्यटक सुंदर एन गांव के लिए देवदूत बनकर आए।

दूरभाष पर बात करने पर सुंदर एन ने कहा कि पहाड़ के लोगों ने विषम परिस्थितियों में रहते हुए भी प्रकृति को संरक्षित रखा है। ऐसे में हमारा भी उनके प्रति कुछ दायित्व बनता है। वे अपनी आय के एक हिस्से से ही यह प्रयास कर रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि इन दूरस्थ गांवों में चिकित्सक सेवाएं बदहाल हैं। इसके लिए वे जल्द ही कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को भी इन गांवों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वे प्रायोजक तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग अपने सामाजिक दायित्व समझ कर प्रयास करें तो दूरस्थ गांवों की छोटी-मोटी समस्याओं का आसानी से समाधान किया जा सकता है।

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