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'पाकिस्तान' से हरिद्वार पहुंची गंगा मां के भक्तों की टोली
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:04 AM IST
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मुलतान जोत यात्रा के दिन देश भर से जुटे पूर्व मुलतानियों (पाकिस्तान में स्थित) का सैलाब गंगा की ओर उमड़ पड़ा।
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चारों ओर से जोतें लेकर गंगा मैया का जयघोष करते हुए श्रद्धालु हरकी पैड़ी पहुंचे। सवेरे हुई दूध की होली के बाद सायंकाल से आतिशबाजी का सिलसिला शुरू हो गया।
रविवार को सवेरे केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन हजारों मुलतानियों के साथ हरकी पैड़ी पहुंचे। जोत सभा के अध्यक्ष दौलतराम अपन तथा युवा संगठन के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नागपाल के नेतृत्व में पिचकारियां और बाल्टी लिए मुलतानी गंगा नहाने के साथ-साथ दूध की होली भी खेल रहे थे। पिचकारियों में दूध भरकर गंगा मैया पर चढ़ाया जा रहा था। इस कार्यक्रम में कई जोत सभाओं के पदाधिकारी पहुंचे।
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सायंकाल मुख्य मुलतान जोत यात्रा भीमगोडा से प्रारंभ हुई। अनेक बैंड-बाजों और झांकियों से सुसज्जित इस यात्रा में भाजपा नेता प्रोफेसर जगदीश मुखी, महापौर दिल्ली नगर निगम सुभाष आर्या, मोहन भारद्वाज, सांसद प्रवेश वर्मा आदि अनेक नेता भी शामिल हुए।
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मुलतानियों ने समूचे नगर को तोरण द्वारों से सजाया था। जोत यात्रा में भाग लेने वाले अपने हाथों में जलती जोत के पुष्पदान लिए हुए थे। अनेक शोभा जोतें भी यात्रा में शामिल थीं। हरकी पैड़ी के समीप हुई सभा में जोत यात्रा के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
गंगा सभा के पदाधिकारियों ने जोत यात्रा का स्वागत किया। शाम से गंगा में जोतें प्रवाहित होनी शुरू हुई और रात तक यह सिलसिला चलता रहा। मालवीय द्वीप पर आतिशबाजी की जाती रही।
आकर्षण रहे डुप्लीकेट
प्रत्येक वर्ष जोत यात्राओं का आकर्षण कई कलाकारों के डुप्लीकेट रहते हैं। इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सिने स्टार अमिताभ बच्चन तथा स्वामी रामदेव के डुप्लीकेट अपनी अदाओं से लोगों का मनोरंजन कर रहे थे।
भक्त रूपचंद लाए थे पहली जोत यात्रा
इस समय पाकिस्तान स्थित मुलतान नगर से पहली जोत यात्रा भक्त रूपचंद 1911 में हरिद्वार लाए थे। रूपचंद अपने कुछ साथियों के साथ मुलतान से पैदल चलते हुए भगवती गंगा की गोद में आए और पवित्र जोत प्रवाहित की। रूपचंद ने जोत यात्रा को वार्षिकोत्सव बना दिया। आज भले ही मुलतान भारत में न हो, किंतु विभाजन के समय भारत आ गए पूर्व मुलतानी परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं।
धार्मिक आयोजनों का हुआ समापन
जोत यात्रा के दिन सवेरे से ही जगह-जगह सुंदरकांड के पाठ और यज्ञ प्रारंभ हो गए थे। सायंकाल जोत यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व इन सभी आयोजनों का समापन हुआ।
कई नगरों के नाम निकली जोत यात्रा
सोनीपत जोत महोत्सव समिति की जोत यात्रा हजारों पूर्व मुलतानियों के साथ मायादेवी प्रांगण से प्रारंभ हुई। इसी भांति पानीपत, हांसी, हिसार, भिवानी, अंबाला, जींद, गुड़गांव, फरीदाबाद आदि शहरों से आए पूर्व मुलतानियों ने अपने नगरों के बैनर तले जोत यात्राएं निकाली। ये सभी जोत यात्राएं अलग-अलग स्थानों से निकलीं पर समापन हरकी पैड़ी पर ही हुआ।