MV Act 2019: अभियान के तहत नियमों की धज्जियां उड़ाता मिला चालक, नशे में था धुत, डीएल भी नहीं
- परिवहन विभाग अफसरों ने चलाया जांच अभियान, 35 गाड़ियों का चालान
- बिना फिटनेस सर्टिफिकेट फर्राटा भर रहीं 15 गाड़ियां पकड़ीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गाड़ी में तय संख्या से ज्यादा सवारी, चालक नशे में धुत और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं। कई वाहन चालक कुछ इसी तरह लोगों की जान से खेल रहे हैं। परिवहन विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को एक ऑटो की जांच की तो यही स्थिति सामने आई।
परिवहन विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को कई इलाकों में वाहनों की जांच के लिए अभियान चलाया। अभियान के दौरान एक गाड़ी को सीज करने के साथ ही 35 गाड़ियों का चालान किया गया। अभियान के दौरान रिस्पना पुल के पास टीम ने एक ऑटो को रोक लिया। अधिकारियों के अनुसार चालक नशे में धुत था और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस व गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी नहीं था। इतना ही नहीं वाहन में तय संख्या से ज्यादा सवारियां थीं। टीम का नेतृत्व कर रहे परिवहन कर अधिकारी एमडी पपनै ने पुलिस को मौके पर बुलाया और वाहन चालक को सौंप दिया।
एआरटीओ अरविंद पांडे ने बताया कि जांच अभियान के दौरान 15 ऐसी गाड़ियों को पकड़ा गया जिनका फिटनेस व रजिस्ट्रेशन सर्टिफि केट नहीं था। कई ऐसे चालकों को भी पकड़ा गया जो मोबाइल फोन पर बात करते हुए गाड़ी चला रहे थे। अभियान को लेकर वाहन चालकों में अफरातफरी का माहौल रहा। कई चालक कार्रवाई से बचने के लिए सवारियों से भरी गाड़ियों को लेकर दूसरे रास्तों से भाग निकले। एआरटीओ पांडे ने बताया कि अधीनस्थ अधिकारियों, कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि रात में भी अभियान चलाएं।
‘पहले खुद नियम मानें पुलिसकर्मी’
पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने पुलिसकर्मियों को हिदायत दी कि वे पहले खुद ट्रैफिक नियमाें का पालन करें। इसके बाद ही आम लोगों का चालान काटें। यातायात नियमाें का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के पुलिस कप्तानों को ट्रैफिक नियमों का पालन सख्ती से कराने के निर्देश दिए। उन्हाेंने कहा कि ट्रैफिक नियमों का पालन करने में पुलिसकर्मियाें को किसी तरह की छूट ना दी जाए। नियमाें का पालन न करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि नियमों की अनदेखी पर चालान न काटने वाले ट्रैफिक और सीपीयू जवानों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए कि पुलिसकर्मी यातायात नियमाें का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि शासनादेश जारी होने पर नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान किए जाएंगे।
फोटो वायरल होने पर थाना प्रभारी हटेंगे
एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने चेतावनी दी है कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में किसी पुलिसकर्मी का फोटो वायरल होता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। साथ ही संबंधित थाने के प्रभारी और आफिस के शाखा प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इसलिए पुलिसकर्मियों को बता दिया जाए कि यातायात नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
इतने गहरे गड्ढे के लिए कितने का चालान कटना चाहिए...
प्रदेश में जल्द ही नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने जा रहा है। वाहन चलाने के दौरान गलती पर मोटा जुर्माना देना होगा। उधर, शहर में तमाम ऐसी सड़कें हैं, जिन पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना ही मुश्किल है। सड़कों के गड्ढ़े ऐसे कि अगर किसी की गाड़ी गिर जाए तो हड्डी टूट जाए। जनता अब सवाल कर रही है, हमारी गलती पर तो चालान कट जाएगा लेकिन ऐसी सड़कें बनाने वालों का चालान कब कटेगा?
मसलन सबसे पहली बात सड़कों को लेकर है। राजधानी में कई ऐसी महत्वपूर्ण सड़कें हैं, जिन पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। अपनी इस गलती को छुपाने में जिम्मेदार अधिकारी कोई कसर नहीं छोड़ते। इन्हें कभी वह ईंटों से तो कभी मिट्टी से भरने का प्रयास करते हैं। ये वही सड़कें हैं जिन पर चलने के लिए आरटीओ में पंजीयन शुल्क के नाम पर वाहन की कीमत का 10 प्रतिशत लिया जाता है। इस राशि में सबसे बड़ा हिस्सा रोड टैक्स का होता है। ये वही सड़कें हैं, जिन पर जरा भी गलती की तो आपका चालान तो कट जाएगा लेकिन अगर चोट लग गई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
इन सड़कों पर संभलकर चलें, हड्डी भी टूट सकती है
राजेंद्रनगर कौलागढ़ रोड, पथरी बाग मार्ग, आईएसबीटी के निकट, बल्लूपुर चौक व एफआरआई के मध्य, जीएमएस रोड, लालपुल से कारगी चौक मार्ग तक।
सड़कों के गड्ढ़े जल्द भरने के लिए लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और एनएच को निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही गड्ढ़े भरने का काम शुरू किया जाएगा।
- सी रविशंकर, जिलाधिकारी, देहरादून