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Uttarakhand: तबाही लेकर आ रहा मानसून...आपदा में उजड़ जाते हैं हर साल 17 गांव, करोड़ों की संपत्ति का नुकसान

Sat, 16 Aug 2025 03:25 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 16 Aug 2025 03:25 PM IST
सार

उत्तराखंड में 2012 से अब तक आई प्राकृतिक आपदा में 2629 परिवारों पुनर्वास-विस्थापन करना पड़ा। आपदा ने लोगों के हंसते खेलते परिवार उजाड़ दिए। लोगों ने अपने परिवार और रोजगार खो दिए।

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Monsoon in Uttarakhand Every year 17 villages are destroyed in disaster property worth crores is lost Disaster
उत्तरकाशी आपदा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तराखंड राज्य में मानसून हर साल तबाही लेकर आ रहा है। पिछले 14 वर्षों में हुई भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं में 245 गांव उजड़ चुके हैं। यानी हर साल राज्य के औसतन करीब 17 गांव आपदा का निवाला बन रहे हैं और रहने लायक नहीं रह गए हैं।

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सरकार को ऐसे गांवों में रह रहे लोगों को सुरक्षित जगहों पर विस्थापित करना पड़ रहा है। प्राकृतिक आपदाओं में तबाह हुए गांवों में करोड़ों की संपत्ति का नुकसान अलग हुआ है। प्रभावितों को घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकाने तलाशने को मजबूर होना पड़ रहा है। आपदा प्रभावित गांवों के प्रभावित 2629 परिवारों का पुनर्वास और विस्थापन संबंधित कार्यवाही की गई है। विभाग के अनुसार संबंधित परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास में 111 करोड़ से अधिक की राशि व्यय हुई है।

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वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा प्रभावित ग्रामों के पुनर्वास व विस्थापन के लिए 20 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया था। जिसके सापेक्ष वर्तमान तक 12 गांवों कुल 255 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास व विस्थापन के लिए 11.44 करोड़ जारी किए गए थे।

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राहत शिविरों में किया गया था शिफ्ट

पिछले साल अतिवृष्टि के चलते केदारनाथ यात्रा मार्गों पर विभिन्न स्थानों को भूस्खलन की घटनाएं हुई थीं। उस दौरान यात्रा 13000 से अधिक लोगों को पैदल और हवाई मार्ग से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया था। जुलाई 2024 में चंपावत जिले में अतिवृष्टि से नुकसान हुआ और 193 परिवार को राहत शिविर में शिफ्ट किया गया था । जुलाई में ही टिहरी गढ़वाल के घनसाली तहसील के अंतर्गत तोली गांव में भूस्खलन हुआ जिसमें 95 परिवार प्रभावित हुए। इन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने का कदम उठाया गया था। ऊधमसिंह नगर के अंतर्गत सितारगंज और खटीमा में भी जल भराव की समस्या हुई थी इसमें भी हजारों लोग प्रभावित हुए थे।

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