लाडले की आंखें सलामत चाहिए तो रखें मोबाइल पर नजर
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कम उम्र में ही बच्चों की नजरें कमजोर हो रही हैं। यह बात तब सामने आई जब हरिद्वार के मंगलौर नगर के दो स्कूलों में 114 बच्चों की नजरें कमजोर पाई गईं । एक बच्चे की एक आंख की रोशनी बिल्कुल खत्म पाई गई है।
करीब 950 बच्चों की आंखों पर की गई जांच के बाद बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से चश्मे उपलब्ध कराए गए हैं। चिकित्सकों की मानें तो हर समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल से भी बच्चों की आंखें कमजोर हो रही हैं।
विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर नगर के नेहरू राष्ट्रीय इंटर कॉलेज तथा राजकीय कन्या हाईस्कूल के छात्र छात्राओं की आंखों का परीक्षण नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नेत्र सहायक ने किया था।
जांच में नेहरू राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के 67 छात्रों की नजर कमजोर तथा एक बच्चे की एक आंख की रोशनी पूरी तरह खत्म पाई गई। इसी तरह राजकीय कन्या हाई स्कूल की 47 छात्राओं की नजर कमजोर पाई गई। अब इन सभी को स्वास्थ्य विभाग की ओर से चश्मे उपलब्ध कराए गए हैं।
आंखों को बचाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
सामुदायिक स्वास्थ केंद्र के नेत्र सहायक पीके गोस्वामी का कहना है कि पोषण की कमी और आंखों की उचित देखभाल नहीं करने के कारण नजर कमजोर हो जाती हैं। चश्मा लगाने से दृष्टि अधिक कमजोर होने से बच जाती है।
उनका कहना है कि आंखें की रोशनी बढ़ाने के लिए हरी सब्जी और पीले फल खाने चाहिए। उन्होंने बताया कि ज्यादा देर तक टीवी नहीं देखना चाहिए। कम से कम दस फीट दूर से टीवी देखना चाहिए। इसके अलावा मोबाइल फोन का भी कम प्रयोग करना चाहिए।
लगातार मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से आंखों की नसें थक जाती हैं इससे उनकी नजर कमजोर हो जाती है। 5 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों और किशोरों को हर छह माह में नेत्र परीक्षण कराते रहना चाहिये।