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नगर निगम को 'लूटने' की फिराक में थी कंपनी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 04 Dec 2013 01:53 PM IST
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देहरादून में बुधवार को शासन में होने वाली बैठक से पहले मुख्य नगर अधिकारी ने डीवीडब्ल्यूएम कंपनी की पोल खोलकर रख दी।
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उन्होंने कंपनी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि आकंड़े दर्शाते हैं कि डीवीडब्ल्यूएम घाटे में नहीं बल्कि फायदे में है। अफसरों ने कंपनी पर फर्जी तरीके से निगम का बजट हड़पने का दोष भी मढ़ दिया।
हो रही निगम की फजीहत
उनका कहना है कि कंपनी के इस रवैये से जहां कामकाज प्रभावित हो रहा है वहीं निगम की भी फजीहत हो रही है। गौरतलब है कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली डीवीडब्ल्यूएम के अधिकारियों का आरोप था कि निगम अधिकारियों के रवैये के कारण कंपनी घाटे में चल रही है।
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निगम ने कंपनी का कई महीनों का बजट भी रोक रखा है। कंपनी ने निगम अफसरों पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया था। इस बीच मंगलवार को मुख्य नगर अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि कंपनी ने झूठे आंकड़े देकर निगम से बजट हासिल करने का प्रयास किया।
जांच में कंपनी के आंकड़े फर्जी निकले। इसके बाद भी शहर के हित के लिए कंपनी पर कार्रवाई नहीं की गई और उसे सही आंकड़े देने को कहा गया। एमएनए का कहना है कि कंपनी फिर भी नहीं मानी तो उसका बजट रोक दिया गया।
कोई भी सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं
उन्होंने बताया कि कंपनी ने अपने बिलों में शहर में 101 बड़े डस्टबिन रखे जाने की ब्यौरा दिया है। साथ ही इतने ही सुरक्षा गार्डों की तैनाती भी दर्शाई गई है। इन सुरक्षा गार्डों को कंपनी हर माह चार लाख चालीस हजार रुपए वेतन दे रही है।
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मुख्य नगर अधिकारी ने दावा किया किसी भी डस्टबिन पर कोई भी सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं है। निगम की जांच तो छोड़िये जनता को भी आज तक वहां कोई नहीं दिखा। ऐसे में फर्जी आकंड़ों पर बजट कैसे जारी कर दिया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके अलावा भी कंपनी ने कई फर्जीवाड़ा किया। वहीं एएमएनए हर्षवर्धन मिश्रा ने कहा कि कंपनी को वाहन के अलावा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर निगम द्वारा ही दिया गया है। फिर भी कंपनी का दावा है कि वह घाटे में है।
उन्होंने बताया कि बुधवार को शासन में होने वाली बैठक में इन तथ्यों को प्रमुखता से रखा जाएगा।
क्या हैं कंपनी के दावे और असलियत
डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली डीवीडब्ल्यूएम कंपनी ने निगम को जो ब्योरा दिया है उसमें पूरे स्टॉफ का खर्चा 36 लाख पचास हजार रुपए बताया गया है। कंपनी का दावा है कि इसी खर्चें के कारण वह घाटे में है।
उधर मुख्य नगर अधिकारी ने आकंड़े पेश किए कि शहर में कुल पचास हजार घरों से ही कंपनी कूड़ा उठा रही है। प्रत्येक घर से चालीस रुपए लिए जा रहे हैं। यह पूरी रकम प्रत्येक माह बीस लाख रुपए के आसपास बैठती है।
इसके अलावा शहर में ढाई सौ के करीब रेस्टारेंट और छोटे ढाबे हैं। वेडिंग प्वाइंट, होटल, धर्मशालाओं और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों से भी कंपनी प्रत्येक माह हजार रुपए से ज्यादा वसूलती है।
आंकड़ों के हिसाब से कंपनी के खाते में वसूली से कुल पचास लाख रुपए आते हैं। वहीं कंपनी को सैलरी के अलावा किसी अन्य मद में खर्चा नहीं करना पड़ता। क्योंकि सभी वाहन निगम के हैं। ऐसे में कंपनी घाटे में कहां है।
कंपनी के पर कतरने की तैयारी
नगर निगम ने अब डीवीडब्ल्यूएम कंपनी के पर कतरने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को मुख्य नगर अधिकारी ने प्रमुख सचिव शहरी विकास को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर विचार करने का आग्रह किया है।
बुधवार को शहरी विकास मंत्री और प्रमुख सचिव की निगम और कंपनी के अधिकारियों के साथ शहर में बिगड़ती सफाई व्यवस्था पर बैठक होनी है। इससे पहले मंगलवार को एमएनए अशोक कुमार ने शासन को पत्र भेजा है।
पत्र में कहा गया है कि कंपनी को डोर-टू-डोर कूड़ा उठान के लिए निगम ने अपने वाहन दे रखे हैं। ऐसे में अब कंपनी को भी अपने वाहन खरीदने के लिए कहा जाना चाहिए। इस दौरान व्यवस्था की जाए कि जब तक कंपनी अपने वाहन न खरीदे तब तक निगम के वाहनों की मरम्मत की जिम्मेदारी उसी की हो।
उन्होंने पत्र में कंपनी द्वारा शहरवासियों से वसूले जा रहे यूजर चार्ज में निगम की हिस्सेदारी की मांग भी उठाई है। पत्र में कहा गया है कि कार्य में लापरवाही पाए जाने पर कंपनी पर अर्थदंड लगाया जाना चाहिए।