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बाल वनिता अनाथालय में रहने वाली छात्रा रहस्यमयी तरीके से गायब, पुलिस विभाग में हड़कंप

Mon, 21 Aug 2017 10:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 21 Aug 2017 10:13 PM IST
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minor girl abscond from baal vanita orphanage dehradun

तिलक रोड स्थित बाल वनिता अनाथालय की एक छात्रा सोमवार को रहस्मय ढंग से लापता हो गई। छात्रा सोमवार सुबह स्कूल के लिए निकली थी, लेकिन छुट्टी के बाद वह घर नहीं पहुंची। काफी तलाश करने के बाद भी देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका।

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पुलिस के अनुसार अनाथालय और स्कूल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इसके अलावा पड़ोसी जिलों के थानों में छात्रा का फोटो भेजकर तलाश कराई जा रही है। छठी की यह छात्रा 2010 में मेरठ में लावारिस हालत में मिली थी, तब से ही वह अनाथालय में रहती है। 
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शहर के तिलक रोड स्थित बाल वनिता अनाथालय में रहने वाले करीब 20-22 बालक और बालिकाएं पास के ही नारी शिल्प विद्यालय में पढ़ने जाती हैं। वार्डन की देख-रेख में यह बच्चे ग्रुप में आत-जाते हैं।
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सोमवार सुबह 7:30 बजे के करीब सभी बच्चे अनाथालय से स्कूल गए थे। छुट्टी के बाद अनाथालय में बच्चों की गिनती हुई तो कक्षा छह की छात्रा भारती आर्य (14) के लापता होने की बात पता चली। इसके बाद आननफानन अनाथालय के सचिव ओपी नागलिया ने खुड़बुड़ा पुलिस चौकी पर छात्रा के गायब होने की जानकारी दी।

शहर कोतवाल डीबीडी जुयाल ने बताया कि छात्रा का पता लगाने में टीम लगा दी गई है। देहरादून के अलावा आसपास के जनपदों में छात्रा का फोटो भेजा गया है। वहीं अनाथालय के सचिव ओपी नागालिया ने बताया कि पुलिस में गुमशुदगी दर्ज करा दी गई है। वह अपने स्तर से भी छात्रा की तलाश करा रहे हैं।

पूरी तैयारी के साथ निकली भारती 

minor girl abscond from baal vanita orphanage dehradun

तिलक रोड स्थित बाल वनिता आश्रम से सोमवार को लापता हुई भारती पूरी तैयारी के साथ निकली थी। किताबें बिस्तर में छोड़ वह स्कूल बैग में कपड़े ले गई। वर्ष 2010 में आश्रम में आई भारती को तपेदिक था, जिसका आश्रम संचालकों ने लंबे समय तक इलाज करवाया। 

तिलक रोड स्थित बाल वनिता आश्रम का शिलान्यास वर्ष 1929 में महात्मा गांधी ने किया था। तब से आश्रम पर कभी कोई दाग नहीं लगा। यहां हुई इस पहली घटना से पूरा स्टाफ परेशान है। सोमवार को हुई पहली घटना के बाद संचालक एक ही बात कह रहे हैं कि दाग लगना था तो लग गया।

आश्रम सचिव ओपी नागलिया ने बताया कि भारती रोजमर्रा की तरह सुबह वार्डन एवं अन्य बच्चों के साथ नारी शिल्प स्कूल के लिए निकली थी लेकिन दिन में वापस नहीं लौटी। इसके बाद उसका कमरा देखा गया तो सभी किताबें वहां बिखरी थी और कपड़े गायब थे। भारती इस तरह तैयारी से निकली लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी।

बताया कि वर्ष 2010 में आश्रम में आई भारती को तपेदिक था। जिसका सभी के सहयोग से इलाज करवाया गया। अब भारती पूरी तरह से ठीक थी। वह पढ़ाई भी अच्छी तरह करती थी और जो भी काम उसको दिया जाता वह पूरे मन से करती।

भारती को देख कभी नहीं लगा कि वह किसी तरह से परेशान है या आश्रम में नहीं रहना चाहती। कहा कि हम पूरी मेहनत से बच्चों को पाल-पोष कर बड़ा करते हैं। इन बच्चियों की शादी भी करते हैं। इसके बावजूद दाग लगना था तो लग गया। बताया कि इस समय आश्रम में कुल 50 बच्चे हैं। जिनमें 20 लड़के-20 लड़कियां और बाकी छोटे बच्चे हैं। 

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