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वयस्क जेल में बंद है नाबालिग आदिवासी
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 30 Oct 2014 11:19 AM IST
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आदिवासी बच्चों को वयस्कों की जेल में रखे जाने की शिकायत उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बच्चों के परिवार वाले गरीब और अशिक्षित हैं, इसलिए उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
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2005 से जेल में बंद
पिथौरागढ़ निवासी जसवंत सिंह जंगपांगी ने आयोग को दिए शिकायती पत्र में बताया कि राजी जनजाति के दो नाबालिग बच्चों को वर्ष 2005 से हरिद्वार स्थित वयस्कों की जेल में रखा गया है।
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दोनों को हत्या के जुर्म में सजा हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उनके परिवार मामले में पैरवी नहीं कर पाए। दोनों बच्चे जब से जेल में हैं, तब से अपने परिवार के किसी सदस्य से नहीं मिल पाए हैं।
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परिवार रजिस्ट्रर के मुताबिक वारदात के समय दोनों नाबालिग थे। वर्ष 2009 में दोनों ने जेल में पांचवीं कक्षा पास की है। बच्चे बार-बार परिवार वालों को चिट्ठी लिखते हैं कि किसी अच्छे वकील से बात कर उच्च न्यायालय में उनकी पैरवी कराई जाए।
मेडिकल जांच में वे नाबालिग साबित हो जाएंगे। लेकिन, परिवार के अशिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।