उत्तराखंड: दुराचार के आरोपी नाबालिग को 10 साल की जेल, बाल सुधार गृह भेजा
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जिला सत्र, बाल न्यायालय के विशेष न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने दुराचार के मामले में दोषी पाए गए किशोर को दस साल के कारावास की सजा सुनाते हुए बाल सुधार गृह रोशनाबाद (हरिद्वार) भेज दिया है।
पुलिस ने बताया 29 नवंबर को कांडा तहसील निवासी एक किशोरी लापता हो गई थी। कई जगह तलाश करने के बाद भी जब किशोरी का पता नहीं चला तो परिजनों ने तीन दिसंबर 2017 को उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई।
17 दिसंबर को पुलिस ने लापता किशोरी को तहसील निवासी एक किशोर के साथ कांडा टैक्सी स्टैंड से बरामद किया था। पुलिस ने किशोरी के आरोपों के आधार पर किशोर के खिलाफ धारा 363, 366, 376, एससीएसटी एक्ट, पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया।
जिला सत्र, विशेष बाल न्यायाधीश की अदालत में चले मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता आबिद हसन, विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो खड़क सिंह कार्की व निर्भया अधिवक्ता इंदिरा दानू ने अदालत में आठ गवाह परीक्षित कराए।
सबूतों के आधार पर न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने किशोर को पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये का अर्थदंड, धारा 366 में 5 वर्ष कारावास, एक हजार रुपये का अर्थदंड, 363 में तीन वर्ष का कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की एससी-एसटी एक्ट में एक वर्ष का कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाते हुए बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अर्थदंड जमा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास होगा। बालिग होने पर किशोर को कारागार में शिफ्ट कर दिया जाएगा।