फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   minor boy committed suicide.

दीदी पापा को बता देंगी... डर में 7वीं के छात्र ने जहर पी दे दी जान

Tue, 21 Jul 2015 08:04 AM IST
ब्यरो/अमर उजाला, गोपेश्वर
ब्यरो/अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Tue, 21 Jul 2015 08:04 AM IST
विज्ञापन
minor boy committed suicide.

तस्वीर में लाल घेरे में स्कूल में बैठा शुभम (फाइल फोटो)

विज्ञापन


चमोली के दशोली ब्लॉक के सिरौं गांव में 13 वर्षीय किशोर ने जहर खाकर जान दे दी। खुशहाल सिंह सजवाण का पुत्र शुभम आदर्श विद्या मंदिर कोठियालसैंण में सातवीं कक्षा में पढ़ता था।

बीती रविवार देर शाम सात बजे शुभम शाम को गांव के अन्य बच्चों के साथ शरारत कर रहा था। इसी दौरान उसकी बहन शोभा ने उसकी शिकायत पिता से करने की बात कही तो वह डरकर बहन के साथ ही घर आ गया।
विज्ञापन


पिता की डांट की डर से शुभम ने घर में रखी कीड़े मारने की दवा गटक ली। शोभा ने देखा कि शुभम उल्टी कर रहा है तो उसने आसपास के लोगों को बुलाया। उस वक्त उसके पिता खुशहाल सिंह और माता उर्मिला देवी खेत से नहीं लौटे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए शुभम को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान रात दस बजे उसने दम तोड़ दिया। छात्र की मौत की सूचना से विद्यालय में भी मातम छाया हुआ है।

बच्चों को कभी नहीं डांटा.. कहकर फफक पड़े पिता

minor boy committed suicide.

13 वर्षीय पुत्र शुभम के पिता की डांट के डर से जहर खाने की बात सुनकर पूरे गांव के लोग सन्न हैं। लोगों का कहना है कि उसके पिता बेहद सौम्य और सरल स्वभाव के थे। वह सभी से शालीनता से बात करते थे फिर भी न जाने शुभम को पिता से डर क्यों लगा जो उसने इतना बड़ा कदम उठाया।

शुभम की मौत से गांव से लेकर उसके विद्यालय में मातम पसरा है। घर पर शुभम की मां प्रमिला, बहन शोभा का रो-रोकर बुरा हाल है। शुभम के पिता कुशाल सिंह और उसके दो भाई भी इससे स्तब्ध हैं।

खुशहाल सिंह कहते हैं कि बच्चे शरारत करते हैं लेकिन उन्हें कभी नहीं डांटा। दोनों बच्चों से हमेशा समझदारी और शांति से ही बात की। उसने इतना बड़ा कदम कैसे उठा लिया यह समझ से परे है... यह कहते कहते वह जोरों से रो पड़े।

शुभम की मौत से गांव के बच्चों में खामोशी

minor boy committed suicide.

आदर्श विद्या मंदिर कोठियालसैंण के प्रधानाचार्य देवेंद्र प्रसाद किमोठी, शिक्षक रघुवीर सिंह बर्त्वाल और कालिका प्रसाद सेमवाल का कहना है कि शुभम पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय में होने वाली अन्य गतिविधियों में भी बेहतर प्रदर्शन करता था। ग्रामीण परिवेश में होने के बावजूद वह नगर के बच्चों से बेहतर प्रदर्शन करता था।

वहीं ग्रामीण गोविंद सिंह का कहना है कि शुभम को गांव के सभी बच्चे पसंद करते थे। उसकी मौत के बाद से गांव के सभी बच्चे भी खामोश से हो गए हैं।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
बच्चों को मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से समझने की जरूरत है। जरूरी है कि अभिभावक बच्चों के साथ नियमित संवाद कर उनकी समस्याओं और भावनाओं को समझें। घर के वातावरण में उसकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करें। बच्चों को तकनीकी विकास की सुविधा एक सीमा तक ही उपलब्ध कराई जाए। घरों में कीटनाशक और अन्य आत्मघाती वस्तुओं और दवाइयों को बच्चों की पहुंच से बाहर रखें।
-उमा शंकर बिष्ट, समन्वयक, चाईल्ड लाइन गोपेश्वर, चमोली।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed