छह महीने के लिए टले सभी कैंट बोर्डों के चुनाव, रक्षा मंत्रालय ने जारी किए आदेश
- दस फरवरी को खत्म हो रहा था वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल
- छावनी अधिनियम-2006 में संशोधन की कवायद है वजह
विस्तार
उत्तराखंड में कैंट बोर्डों के चुनाव अब छह महीने बाद होंगे। बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इसकी वजह छावनी अधिनियम-2006 में संशोधन माना जा रहा है।
मौजूदा कैंट बोर्ड के निर्वाचित सदस्यों का पांच साल का कार्यकाल दस फरवरी को समाप्त हो रहा है। बोर्डों की ओर से पूर्व में मिले निर्देशों के अनुरूप वार्ड आरक्षण सहित वोटर लिस्ट आदि का कार्य पूरा कर लिया था।
ऐसे में एक माह पहले चुनाव की अधिसूचना जारी हो जानी चाहिए थी, लेकिन चुनाव अधिसूचना जारी नहीं हुई। बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने छह माह के लिए चुनाव टालने के आदेश जारी किए।
पहले भी बढ़ाया जा चुका है कार्यकाल
दरअसल, केंद्र सरकार छावनी अधिनियम-2006 में संशोधन करने पर विचार कर रहा है। इसमें कैंट बोर्ड उपाध्यक्षों का सीधे चुनाव और निर्वाचित सदस्यों को अधिकार देने की बात हो रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक केंद्र इस संशोधन को लागू कर अगले चुनाव के पक्ष में हैं।
वर्ष 2003 में भी कैंट बोर्डों को कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है। उस समय बोर्डों का कार्य 2003 में खत्म हो गया था, लेकिन उसके बाद रक्षा मंत्रालय ने कार्यकाल छह-छह महीने के लिए दो बार बढ़ाया। वर्ष 2004 तक तक बोर्ड का कार्यकाल चला। इसके बाद छावनी अधिनियम 2006 को लागू कर दो साल तक कैंट बोर्डों को भंग कर 2008 में नए चुनाव कराए गए।