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जारी होते ही विवादों में पलायन आयोग का विज्ञापन, उत्तराखंड के युवाओं में गुस्सा

Tue, 06 Mar 2018 03:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 06 Mar 2018 03:05 PM IST
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migratory commission Advertisement in dispute
Collage Students - फोटो : File Photo

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पलायन आयोग में काम करने के लिए जारी विज्ञापन विवादों में आ गया है।

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इस विज्ञापन के जरिये उत्तराखंड से पलायन रोकने के लिए केवल आईआईटी, आईआईएम जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के अलावा विदेशी विश्वविद्यालयों के छात्रों से आवेदन मांगे गए हैं। इस पर सवाल उठाते हुए प्रदेश के युवाओं का कहना है कि क्या पहाड़ के किसी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र पलायन को बेहतर नहीं समझ सकते। उन्होंने विज्ञापन को संशोधित करने की मांग की है।

ग्रामीण विकास आयुक्त कार्यालय की ओर से सोमवार को एक विज्ञापन जारी किया गया है। अंग्रेजी में जारी इस विज्ञापन में पलायन आयोग के लिए यंग प्रोफेशनल्स मांगे गए हैं। इसमें कहा गया है कि देश के सर्वमान्य संस्थानों के अलावा विदेशी विश्वविद्यालयों के जो छात्र पहाड़ में काम कर सकते हों, वे आवेदन कर सकते हैं। यह विज्ञापन बेहद शॉर्ट नोटिस पर जारी किया गया है। इसकी अंतिम तिथि दस मार्च तय की गई है। वहीं, विज्ञापन जारी होते ही प्रदेश के प्रबंधन और दूसरे सोशल सर्विस से जुड़े संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह पहाड़ के संस्थानों और छात्रों से छलावा है। 
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एमबीए के छात्र विकास रावत का कहना है कि उत्तराखंड के पहाड़ों में पढ़ने वाला छात्र क्या पलायन को बेहतर नहीं समझ सकता है? उन्होंने इस विज्ञापन को तत्काल संशोधित करने की मांग की है। इसी तरह बीटेक के छात्र विनीत नेगी का कहना है कि पहाड़ से पलायन रोकने में पहाड़ के युवा ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं। पलायन आयोग को तत्काल इस विज्ञापन को संशोधित कर यहां के विश्वविद्यालय, कॉलेजों के युवाओं को मौका देना चाहिए। विज्ञापन के अनुसार, भर्ती होने वाले छात्रों को ग्रामीण विकास विभाग की ओर से प्रतिमाह 40 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह छात्र पहाड़ में पलायन के पहलुओं पर शोध करेंगे।
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केवल इन संस्थानों के युवाओं को मौका
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी, कनाडा (डीएलआरआई), फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली विवि (एफएमएस), इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद, गुजरात (आईआरएमए), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, मध्य प्रदेश (आईआईएफएम), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई (टीआईएसएस), जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विसेज रांची (एक्सआईएसएस), जेवियर यूनिवर्सिटी भुवनेश्वर (एक्सआईएमबी), नेशनल लॉ स्कूल बंगलूरू (एनएलएस), नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ तेलंगाना (एनएएलएसएआर), दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज और राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर का कोई प्रतिष्ठित संस्थान के छात्र। 


यह विज्ञापन नीति आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक है। नीति आयोग ने अपने दिशा-निर्देशों में कहा है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के संस्थानों से यंग प्रोफेशनल्स लिए जाएं। इसीलिए विज्ञापन में ये प्रावधान किए गए हैं। 
- एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, ग्राम विकास एवं पलायन आयोग

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