पलायन आयोग की रिपोर्ट: उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के लिए मशहूर बागेश्वर पर पलायन की मार
- करीब 28 हजार ने किया पलायन, कपकोट को लेकर जताई जा रही है चिंता
- जनसंख्या वृद्धि दर हुई ऋणात्मक, आयोग ने जारी की रिपोर्ट
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धार्मिक और अन्य तरह के पर्यटन के लिए विख्यात बागेश्वर जिला भी पलायन की मार से बच नहीं पाया है। राहत है तो इतनी कि यहां स्थायी की जगह अस्थायी पलायन अधिक हुआ है। पलायन आयोग की ओर से बागेश्वर के लिए जारी रिपोर्ट से यह तस्वीर उभर कर सामने आई है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बागेश्वर जिले की पलायन आयोग की ओर से तैयार रिपोर्ट का विमोचन किया। सीएम ने कहा कि रिपोर्ट से जाहिर है कि प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा आदि की स्थिति को और अधिक बेहतर करना होगा। आयोग की रिपोर्ट से साफ है कि बागेश्वर जिला भी पलायन से खासा प्रभावित है।
यहां करीब 23 हजार ने अस्थायी रूप से पलायन किया। राहत है तो इतनी कि यह पलायन अस्थाई है और इसका मतलब है कि ये लोग अपने मूल स्थान से संपर्क बनाए हुए है। असली चिंता कपकोट को लेकर सामने आई है। पिछले दस साल में यहां जनसंख्या वृद्धि दर शून्य से तीन प्रतिशत नीचे हो गई है। इसी तरह ढाई लाख की जनसंख्या में यहां से करीब पांच हजार लोगों ने स्थायी रूप से पलायन किया।
बागेश्वर पर एक नजर
जनसंख्या- 2,59,898
पुरुष- 1,24,326
महिलाएं- 1,35,572
-346 ग्राम पंचायतों से कुल 23,388 ने अस्थायी रूप से पलायन किया
-195 ग्राम पंचायतों से 5912 व्यक्तियों ने पूर्णरूप से पलायन किया
-सभी विकास खंडो में स्थायी पलायन की तुलना में अस्थायी पलायन अधिक हुआ
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1. पशुधन की गुणवत्ता में सुधार लाने एवं कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए
2. दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादकों की उपज के लिए पनीर, घी आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया जाए, दुग्ध समितियों की सक्रियता बढ़ाने एवं दुग्ध प्रसंस्करण केंद्र खोले जाए।
3. होम स्टे की संख्या बढ़ाई जाए, इकोटूरिज्म गतिविधियों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित किए जाए, पर्यटन से जुड़े कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाया जाए
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5.फसलों को बंदरों और जंगली सूअरों जैसे जानवरों से नुकसान से बचाव के लिए वन विभाग की सहायता से बंदर बाड़ों/सोलर पावर फैन्सिंग का निर्माण कराया जाए
ये थे शामिल...
रामप्रकाश पैन्यूली, सुरेश सुयाल, दिनेश रावत , अनिल सिंह शाही। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रुद्रप्रयाग से रंजना रावत ने अपने सुझाव रखे। अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, आयोग के सदस्य सचिव रोशन लाल आदि
आयोग अब तक राज्य के पर्वतीय जनपदों, ईको टूरिज्म, ग्राम्य विकास एवं कोविड-19 के प्रकोप के दौरान राज्य में लौटे प्रवासियों एवं उनके पुनर्वास पर आधारित 11 सिफारिशें प्रस्तुत कर चुका है। बागेश्वर में कपकोट में पलायन की स्थिति को चिंताजनक पाया गया है। यहां शून्य से तीन प्रतिशत नीचे जनसंख्या वृद्धि दर पाई गई है।
-डा. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष पलायन आयोग