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यहां बीमारी के डर से अपने घर 'छोड़' रहे लोग

Wed, 08 Jan 2014 12:41 PM IST
राजीव पांडे/ अमर उजाला, हल्द्वानी
राजीव पांडे/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Wed, 08 Jan 2014 12:41 PM IST
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migration because of illness

उत्तराखंड में नए किस्म का पलायन पनप रहा है। अब डायलिसिस की खातिर लोगों को घर छोड़ना पड़ रहा है।

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सालों से किराए के मकानों पर रह रहे
हालांकि, डायलिसिस की समस्या पहाड़ों पर ही नहीं, तमाम जिलों में पहले भी थी। लेकिन, अब बीमारी के प्रति लापरवाही वाला नजरिया बदला है। हल्द्वानी में ही पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत के करीब 19 लोग डायलिसिस के लिए सालों से किराए के मकानों पर रह रहे हैं।

यह हाल तब है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हर जिले में डायलिसिस और नेफ्रोलॉजिस्ट रखने के आदेश दिए हैं। बेस अस्पताल में डायलिसिस करा रही ज्योति थापा को हल्द्वानी में रहते हुए दो साल से अधिक समय हो गया है।
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वह पिथौरागढ़ की रहने वाली हैं और उनकी किडनी में दिक्कत है। ज्योति के परिजनों ने उसके इलाज पर अब तक उतना रुपया नहीं फूंका, जितना हल्द्वानी में किराए के मकान में रहने और खाने पर खर्च हो गया।
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हजारों रुपए का खर्चा
ज्योति के मकान का किराया ही 3000 रुपए है, जबकि डायलिसिस के एक किट में उनको 4690 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इससे पांच बार डायलिसिस होती है।

मुनस्यारी के दरांती गांव की गंगोत्री देवी चाहती थीं कि इस उम्र में घर पर नाती-नातिन के साथ खेले, लेकिन एक साल से उनका डायलिसिस चल रहा है। डायलिसिस के कारण ही अल्मोड़ा के 75 वर्षीय उमेद सिंह भी अपने घर नहीं गए हैं। वह बुढ़ापे में घर छूटने को सबसे बुरा मानते हैं।

हर महीने आठ नए रोगी
किडनी संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहा है। बेस अस्पताल में पीपीपी मोड पर चल रहे डायलिसिस सेंटर में हर महीने आठ नए रोगी पहुंचते हैं।

सेंटर इंचार्ज प्रभात कुमार बताते हैं कि पहाड़ से आने वाले लोगों की संख्या बेहद कम है क्योंकि लोगों के पास इलाज के लिए पैसा ही नहीं है, जबकि सप्ताह में तीन बार डायलिसिस जरूरी है, लेकिन यहां बहुत कम लोग इस मानक को पूरा करते हैं।

डायलिसिस न मिलने पर किडनी रोगी की पांच साल में मौत हो सकती है। नैनीताल के पहाड़ी इलाकों के लोग कमरा किराए पर लेने के बजाय एक दो दिन यहां आकर होटलों में रह लेते हैं।


किडनी खराब होने के तीन कारण

डायबिटीज : अधिक शुगर वाला खून जब किडनी से होकर गुजरता है तो वह किडनी की पतली नसों को नुकसान पहुंचाता है। उत्तराखंड में करीब 20 लाख डायबिटीज के मरीज हैं और हर तीसरे मरीज की किडनी में खराबी आने की आशंका रहती है।

हाई ब्लडप्रेशर : तनाव में काम करने वाले लोगों पर हाई ब्लडप्रेशर घर कर लेता है। शरीर में तेजी से दौड़ता खून किडनी खराब कर देता है।

दर्द निवारक दवाएं : दर्द निवारक दवाओं की थोड़ी सी भी अधिक डोज ऐसे लोगों की किडनी हमेशा के लिए खराब कर सकता है, जिनकी किडनी कमजोर है।

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