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मान्यता सरकारी पर नहीं मिला मिड-डे मील
योगेंद्र सिंह/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Thu, 28 Nov 2013 07:30 PM IST
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उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के मान्यता प्राप्त 27 मदरसों के 4000 से अधिक बच्चे मिड-डे मील के लिए तरस रहे हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद सर्व शिक्षा विभाग में कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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एक बार कुछ मदरसों में किताबें और चावल भेजने के बाद न तो भोजन पकाने का पैसा दिया गया और न ही यूनिफॉर्म मुहैया कराई गई। जबकि अन्य स्कूली बच्चों को 4.5 करोड़ रुपये की वर्दी दी गई।
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27 मदरसों को मान्यता
लंबे समय से मदरसे सरकारी मान्यता की मांग करते रहे। इस साल तीन जून को सरकार ने जिले के 27 मदरसों को मान्यता दे दी। सरकारी स्कूलों की तरह मदरसों की ओर से बच्चों को मध्यान्ह भोजन, निशुल्क किताबें और यूनिफॉर्म मुहैया कराए जाने की गुहार लगाई गई तो 15 अगस्त को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सभी सुविधाओं की घोषणा कर दी।
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गरीब बच्चों को खाना मयस्सर नहीं
इसके बाद सर्व शिक्षा अभियान की जिला परियोजना इकाई ने कई मदरसों में बच्चों को पुस्तकें दी और एक माह के मध्यान्ह भोजन के लिए चावल का कोटा भेजा। लेकिन भोजन पकाने के लिए प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को साढे़ तीन और जूनियर कक्षाओं में पांच रुपये प्रति छात्र छात्रा के हिसाब से दिए जाने वाला पैसा नहीं भेजा गया जिसके चलते मदरसों में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के गरीब बच्चों को आज तक खाना मयस्सर नहीं हो सका। मदरसों के प्रबंधक और प्रधानाध्यापक जिला परियोजना कार्यालय के चक्कर काटकर थक चुके हैं लेकिन हासिल कुछ नहीं हो रहा।
इस साल यूनिफार्म में दिए साढ़े चार करोड़
इस साल जिले के 908 राजकीय प्राथमिक और जूनियर स्कलों में पढ़ने वाले करीब 1,11,000 बच्चों को दो-दो यूनिफार्म के लिए 400 रुपये प्रति छात्र छात्रा के हिसाब से लगभग साढ़े चार करोड़ रुपया सर्व शिक्षा अभियान जिला परियोजना की ओर से दिया गया। वहीं निशुल्क चावल दिए जाने के अलावा हर महीने करीब पौने दो करोड़ रुपया मिड-डे मील के लिए दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की ज्यादातर घोषणाएं हवाई साबित हो रही हैं। मिड-डे मील, वर्दी और किताबें नहीं दिया जाना अल्पसंख्यक आवाम के साथ धोखा है। सरकार को अपनी कलह निपटाने से फुर्सत नहीं गरीबों की सुध कैसे लेगी। -मन्नवर कुरैशी, रानीपुर मंडलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा भाजपा
मदरसों की ओर से हमारे पास प्रस्ताव आए थे जो राज्य परियोजना को भेजे गए। राज्य परियोजना ने शासन की स्वीकृति के लिए भेजे। जैसे ही मीड-डे मील और यूनिफार्म का का बजट शासन की ओर से जारी होगा मदरसों को देने में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। -पुष्पारानी वर्मा, जिला परियोजना अधिकारी, एसएसए