मिड-डे-मील से होगी गुरुजी की छुट्टी, अब इन्हें मिलेगा जिम्मा
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को मिड-डे-मिल के झंझटों से मुक्ति मिलने की उम्मीद जग गई है। प्रदेश सरकार इस काम को एक अध्यात्मिक संस्था इस्कॉन को देने का मन बना रही है।
पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले प्रदेश के चार जिलों में यह योजना लागू की जाएगी। यह प्रयोग सफल रहा तो बाकी जिलों में भी लागू की जाएगी। यदि ऐसा होता है तो सरकारी स्कूलों में शिक्षक पढ़ाई के लिए छात्रों को ज्यादा समय दे पाएंगे।
सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को सर्व शिक्षा अभियान के तहत मध्याह्न भोजन मुफ्त कराया जाता है। मिड-डे मील की जिम्मेदारी संभालने के चक्कर में शिक्षक अपने मूल कार्य अध्यापन पर पूरा फोकस नहीं कर पाते।
खासकर एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में मिड-डे-मील के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसी तमाम बातों को ध्यान रखते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षकों को मिड-डे-मील की जिम्मेदारी से मुक्त करने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने इस संबंध में जरूरी निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर व नैनीताल में आध्यात्मिक संस्था इस्कॉन को मिड-डे-मील का जिम्मा दिया जा रहा है। संस्था अपनी केंद्रीय रसोई से स्कूलों में मिड-डे-मील सप्लाई करेगी।
इस फैसले से ऐसे शिक्षकों में तो खुशी की लहर है, जिनके लिए अध्यापन पहली प्राथमिकता है। वहीं मिड-डे-मील को अध्यापन से ज्यादा तवज्जो देने वाले शिक्षकों को थोड़ा झटका लगा है। इस फैसले से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधरने की उम्मीद जरूर जगी है।
स्कूलों में घंटी बजाएंगी भोजन माताएं
गुणवत्ता की जांच को जाएगी पहली थाली
हरिद्वार (ब्यूरो)। स्कूलों में मिड-डे-मील की जिम्मेदारी इस्कॉन को मिलने से मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता भी सुधरेगी। इस्कॉन की केंद्रीय रसोई में भोजन बनने के बाद पहली थाली जांच के लिए खाद्य निरीक्षक को जाएगी। खाद्य निरीक्षक के चेक करने के बाद खाना स्कूलों में भेजा जाएगा। जबकि अभी तक मिड-डे-मील की गुणवत्ता सिर्फ भोजन माता और शिक्षकों के भरोसे है।
स्कूलों में घंटी बजाएंगी भोजन माताएं
हरिद्वार (ब्यूरो)। सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मिल भले ही बाहर से मंगाया जाएगा, लेकिन भोजन माताएं यथावत स्कूलों में कार्यरत रहेंगी। इस्कॉन संस्था की ओर से शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय के सामने इस योजना का प्रस्ताव रखने पर भोजन माताओं को लेकर भी मंथन हुआ। अकेले हरिद्वार जनपद में करीब डेढ़ हजार भोजन माताएं मानदेय पर स्कूलों में कार्यरत हैं। शिक्षामंत्री और अधिकारियों की बैठक में तय हुआ कि कुछ भोजन माताओं को भोजन परोसने और कुछ भोजन माताओं को घंटी बजाने, साफ सफाई जैसे कार्यों में लगाया जाएगा।
केंद्रीय रसोई से होगी आपूर्ति
हरिद्वार (ब्यूरो)। इस्कॉन संस्था की ओर से शिक्षा मंत्री को सौंपी गई कार्ययोजना के मुताबिक स्कूलों में मिड-डे-मील सप्लाई के लिए हर जनपद में केंद्रीय रसोई बनाई जाएगी। यहां खाना बनने के बाद भोजन को स्कूल तक पहुंचाने के लिए अलग से टीम बनेगी। मध्याह्न भोजन समय पर स्कूल में पहुंचे, इसके लिए हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर जैसे बड़े जनपदों में एक से ज्यादा रसोइयां भी बनाई जा सकती हैं।
इस्कॉन संस्था की ओर से अक्षय पात्र योजना का प्रस्ताव शिक्षामंत्री के सामने रखा गया है। फिलहाल इस योजना का गुण दोष के आधार पर परीक्षण किया जा रहा है। योजना लागू होने पर भोजन माताओं को यथावत रखते हुए भोजन परोसने, घंटी बजाने, साफ सफाई जैसे कार्यों में लगाया जाएगा।
- पीके बिष्ट, सयुंक्त निदेशक मिड-डे-मील, उत्तराखंड