फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Microfinance Sector spoiled due to note ban

नोटबंदी से तबाह हो रहा है माइक्रोफाइनेंस सेक्टर 

Thu, 24 Nov 2016 11:42 AM IST
गौरव मिश्रा / अमर उजाला, देहरादून
गौरव मिश्रा / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 24 Nov 2016 11:42 AM IST
विज्ञापन
Microfinance Sector spoiled due to note ban
note

ठेली पर सब्जी बेचने वाले शिवप्रताप की बिक्री आधी से भी कम रह गई है। ऐसे में उसका परेशान होना लाजमी है।

विज्ञापन


उसे किसी बैंक ने नहीं बल्कि एक माइक्रो फाइनेंस संस्था ने छोटा सा लोन दिया था। वह रोजाना व साप्ताहिक तौर पर लिए हुए ऋण की अदायगी कर रहा था। पर अचानक हुई नोटबंदी से उसका कारोबार प्रभावित हो गया। ऐसे में वह रोजाना और साप्ताहिक लोन का रीपेमेंट नहीं कर पा रहा है।

शिव प्रताप की तरह मंगू लाल मूंगफली, गुड़पट्टी बेचकर अपना गुजारा करता है। उसे भी लोन अदा नहीं कर पाने की टेंशन खाए जा रही है। शिवप्रताप और मंगूलाल की तरह अकेले देहरादून में हजारों छोटे स्वरोजगारी एनबीएफसी, एमएफआई जैसी संस्थाओं से छोटा लोन लेकर अपना धंधा चलाते हैं। क्योंकि सरकारी और निजी बैंक उनकी तरफ देखते तक नहीं। इधर लोन की किश्त नहीं आने से एनबीएफसी, एमएफआई जैसी संस्थाओं के पास कैश की कमी हो गई है।
विज्ञापन


दरअसल ये छोटे-छोटे कारोबारी पहले बेहद महंगी ब्याज दरों पर साहूकारों और आढ़तियों के साथ ही बड़े व्यापारियों से सूद पर कर्जा लेते थे। पर पिछले कुछ सालों से एनबीएफसी व एमएफआई के फैलाव से सूक्ष्म स्वरोजगारियों को अपेक्षाकृत कम ब्याजदर (बैंको से कहीं अधिक) पर ऋण मिलने लगा। इससे इन्हें काफी राहत मिली।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर अचानक हुई नोटबंदी से समूची अर्थव्यवस्था की तरह सूक्ष्म उद्यम विशेषकर स्वरोजगारियों की आर्थिकी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे ये दोनों ही वित्तीय संस्थाएं इस समय बेहद चिंतित और घबराए हुए हैं। द एसोसिएशन ऑफ कम्यूनिटी डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस की वर्ष 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में 16 एमएफआई काम कर रही हैं।

लिक्वीडिटी की कमी ने हालात बेकाबू कर दिए हैं। कैश फ्लो नहीं होने से स्वरोजगारियों का बिजनेस साइकल प्रभावित होने से एमएफआई की जड़ें भी हिल गई है। कैश ही माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की प्राणवायु होता है। पिछले कई दशकों में नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों व माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं द्वारा अच्छा काम किया गया है। हालांकि अधिकतर एमएफआई खुद ही दूसरी संस्थाओं से ऋण लेकर बेहद छोटे कारोबारियों को लोन देती हैं। इसलिए इन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सरकार को इस बाबत हस्तक्षेप कर इनको राहत देनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक इस बारे में काफी कुछ कर सकता है। 

- इस्लाम हुसैन, पहल सामुदायिक सूक्ष्म वित्त संस्था 

नाबार्ड बड़ी तादाद में स्वयं सहायता समूहों को कई तरीके से वित्त पोषित करता है। इनमें से अधिक उत्पादक व लाभकारी हैं। हमारे वित्त पोषण का तरीका पूरी तरह से अलग है। इसमें डिफॉल्ट की दर नहीं के बराबर है। हम बहुआयामी तरीके से सूक्ष्म उद्यमियों को ऋण प्रदान करवाते हैं। हम सिर्फ माइक्रो लैंडिंग ही पर नहीं बल्कि माइक्रो फाइनेंस पर विश्वास रखते हैं। इसलिए हमारे वित्त पोषण का मॉडल दुनिया भर में स्वीकार्य हो रहा है। 
- डा. सुनील पांडे, वरिष्ठ प्रबंधक नाबार्ड 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed