अब गांव बनाएंगे अपनी-अपनी बिजली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में दो मेगावाट तक की माइक्रो हाइड्रो परियोजनाएं ग्राम पंचायतों के लिए आरक्षित की जाएंगी। इस बाबत एक नीति तैयार की जाएगी जिसके लिए ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों से बातचीत की जाएगी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में हुई बैठक में माइक्रो व मिनी हाइड्रो पावर के लिए नीति बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को ऊर्जावान बनाने और ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायतों व स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी। माइक्रो हाइड्रो परियोजनाओं में उस ग्राम पंचायत को प्राथमिकता दी जाएगी जिसके क्षेत्र में परियोजना प्रस्तावित है।
निवेशकों की स्टैंडिंग कमेटी, शासन स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी व मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मानीटरिंग कमेटी गठित की जाएगी। सचिव डॉ. उमाकांत पंवार ने प्रस्तावित नीति के संबंध में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया।
बैठक में उपस्थित उद्यमी अरुण शर्मा ने कहा कि नीति बनाने से पहले सभी से राय मशविरे का लाभ प्रदेश को मिलेगा। उन्होंने प्रक्रियाओं का टाइम फ्रेम तय करने का भी सुझाव दिया। राकेश अग्रवाल ने एप्रोच रोड, प्रवीण गुप्ता ने सिंगल विंडो सिस्टम, विनोद कुमार अरोड़ा ने प्रोजेक्ट के आवंटन, आशुतोष पाठक ने ट्रांसमिशन कॉस्ट को कम करने का सुझाव दिया।
हालांकि, बहुत से उद्यमियों ने पर्यावरण संबंधी आशंकाएं भी व्यक्त कीं। बैठक में पूर्व सांसद अमर सिंह, विधायक नवप्रभात, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव ओमप्रकाश, सचिव मोहम्मद शाहिद, शैलेश बगोली आदि उपस्थित रहे।
इस तरह लगेंगे माइक्रो व मिनी हाइड्रो प्रोजेक्ट
केंद्र सरकार 100 किलोवाट क्षमता तक की परियोजनाओं के निर्माण के लिए 1.25 लाख रुपये प्रति किलोवाट की दर से, जबकि 100 किलोवाट से अधिक क्षमता की परियोजना के लिए 0.75 लाख रुपये प्रति किलोवाट की दर से राशि उपलब्ध कराती है।
राज्य सरकार भी 100 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता तक की परियोजनाओं के निर्माण के लिए अनुपूरक अनुदान के रूप में सहायता उपलब्ध कराएगी। अवशेष धनराशि स्थानीय विकासकर्ता के चयनित ग्राम पंचायत के साथ स्पेशल परपज व्हीकल कंपनी बनाकर वहन की जाएगी।
तीन श्रेणियां होंगी
2 मेगावाट क्षमता तक की परियोजनाओं पर राज्य सरकार कोई रॉयल्टी, वाटर यूजर चार्ज नहीं लेगी। इन परियोजनाओं को उद्योग का दर्जा प्राप्त होगा।
दूसरी श्रेणी में 2 मेगावाट से 5 मेगावाट व तीसरी श्रेणी में 5 मेगावाट से 25 मेगावाट तक की परियोजनाएं शामिल होंगी। इनमें भी उत्तराखंड के मूल निवासियों या पंजीकृत फर्मों को प्राथमिकता दी जाएगी। कैप्टिव (अनुबंधित) ऊर्जा उत्पादक को प्रीमियम में 20 प्रतिशत छूट दी जाएगी। कैप्टिव ऊर्जा की खपत पहाड़ी क्षेत्र में लगे उद्योगों में होने पर प्रीमियम में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकती है।
क्या फिर इच्छुक हैं अमर सिंह
बैठक में पूर्व सांसद अमर सिंह की उपस्थिति से कयास लगाए जा रहे हैं कि माइक्रो पावर प्रोजेक्ट में उनकी आज भी दिलचस्पी है। अमर सिंह ने वर्ष 2011 में पिथौरागढ़ में एक पावर प्रोजेक्ट लगाना चाहा था, हालांकि उसे न तो स्वीकृत किया गया न ही रिजेक्ट। बताया जा रहा है कि अमर सिंह के इस प्रोजेक्ट में करीब 30 करोड़ रुपये फंसे हैं। उन्होंने सीएम से कहा कि उनके प्रोजेक्ट को अगर अनुमति नहीं दी जानी है तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाए।