23 यात्रियों से भरी बस का अचानक हुआ ब्रेक फेल, फिर इस तरह बची सबकी जान
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कोटद्वार-धुमाकोट मार्ग पर दुगड्डा सेंधीखाल के बीच एक मोड पर जीएमओयू की कोटद्वार-धुमाकोट-भौन बस सेवा दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पहाड़ी मार्ग पर बस के ब्रेक फोने के बाद बस चालक राम सिंह ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए बस में सवार 23 लोगों की जान बचाई। जान बचाने के कारण वह घायल हो गया। उसे राजकीय बेस अस्पताल कोटद्वार में भर्ती कराया गया है।
रविवार को कोटद्वार से सुबह आठ बजे जीएमओयू की धुमाकोट-भौन जाने के लिए दैनिक सेवा 23 यात्रियों को लेकर रवाना हुई। दुगड्डा से 9वें किमीं में गौलीखेत के पास आगे मोड़ देखकर बस चालक राम सिंह ने बस के ब्रेक मारने चाहे लेकिन वाहन पर ब्रेक नहीं लगे।
वाहन चालक ने ब्रेक लगाने के बहुत प्रयास किए, लेकिन बस कंट्रोल से बाहर हो गई। उसने मोड़ के आगे खाई को देखते बड़ी दुर्घटना का अंदेशा होती ही बस के ब्रेक फेल होने की सूचना बस में बैठी सवारियों को दी और सूजबूझ का परिचय देते हुए बस को मोड़ से पहले पहाड़ी पर टकरा दिया। बड़े झटके के साथ बस वहीं पर रुक गई, जिससे बड़ी अनहोनी होने से बच गई।
बस के पहाड़ी से टकराते ही सवारियों की चीख पुकार मच गई। बस को पहाड़ी से टकराने के बाद बस चालक 40 वर्षीय राम सिंह पुत्र गोपाल सिंह निवासी मठाली जयहरीखाल सीट में फंस कर गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों ने बामुश्किल उसे बस से बाहर निकाला।
जख्मी चालक, जीवानंदपुर कोटद्वार निवासी पारुल रावत (40) और बिजनौर निवासी रमेश ग्यागी को 108 सेवा के माध्यम से कोटद्वार बेस हॉस्पीटल पहुंचाया गया। अन्य जख्मी यात्री केश्वानन्द, सरिता देवी, कमला देवी, जितेंद्र, सोनम, धीरा देवी, अभिषेक, गीता, सुष्मा, चैन सिंह निवासी तहसील धुमाकोट को मामूली खरोंच आई। उन्होंने प्रशासन और जीएमओयू पर उनका मौके पर प्राथमिक उपचार नहीं कराने का आरोप लगाया।
इस संबंध में एआरटीओ आरएस कटारिया ने बताया कि उन्हे दुर्घटना की सूचना मिली है। दुर्घटना के वास्तविक कारण का पता करने के लिए शीघ्र दुर्घटना स्थल का निरीक्षण कराया जाएगा।