देहरादून। आंगनबाड़ी केंद्रों में हर माह बच्चों के परीक्षण के बाद उन्हें दवा दी जाती है। लेकिन, दून के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में मात्र रजिस्टर में दवा बांटी जा रही है। राज्य खाद्य आयोग की टीम के निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ है। इसके अतिरिक्त केंद्रों में कई अन्य अनियमितताएं भी पाई गई हैं। इस पर आयोग अध्यक्ष ने सुपरवाइजरों को फटकार लगाई है। साथ ही टीम में शामिल सदस्यों को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
बुधवार को राज्य खाद्य आयोग अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह रावत ने टीम के साथ गुजराड़ा, मानसिंह वाला, डांडा खुदाने वाला, डांडा लखौंड, नागल, हटनाल में आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों का निरीक्षण किया। दोनों में कई खामियां सामने आई। डांडा लखौंड, हटनाल में आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए शौचालय और किचन की व्यवस्था नहीं पाई गई। यहां बच्चे खुले में शौच करते पाए गए। डांडा लखौंड में ही बच्चों का ग्रोथ रजिस्टर भी मेंटेन नहीं पाया गया। नियमानुसार मिड डे मील का सैंपल अवकाश तक सुरक्षित रखना होता है। जिससे यदि कोई घटना होती है तो इसकी जांच की जा सके। जीआईसी गुजराड़ा में मिल-डे मील का सैंपल नहीं मिला। इस पर आयोग ने सुपरवाइजर को फटकार लगाकर जवाब तलब किया है। एक आंगनबाड़ी केंद्र में डॉक्टरों ने रजिस्टर में यह दर्ज किया है कि यहां बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा बांटी गई। लेकिन, जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से पूछा गया तो उन्होंने दवा बांटने से पूरी तरह इंकार किया। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे फर्जी कार्य अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों में भी हो रहे हैं। जहां डॉक्टर केवल रजिस्टर में दवा वितरित कर रहे हैं। इस पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। टीम में शामिल सदस्यों ने स्कूलों में बन रहे मध्याह्न भोजन को चखा और छात्रों के उपस्थिति रजिस्टर, चावल, दाल, किचन में पक रहे खाने की गुणवत्ता आदि की जांच परखी। आयोग अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जिन आंगनबाड़ी केंद्रों में अनियमितताएं पाई गई हैं। उनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। टीम में आयोग सदस्य संदीप सिंघल, देंवेंद्र सिंह नेगी, आईसीडीएस की ललिता पंवार, पूर्ति निरीक्षण विभूति जुयाल आदि मौजूद रहे।